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...तो अब किसी जिंदगी पर नहीं झपट सकेगा काल

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हरिद्वार।
बिजली की लाइन भूमिगत होने से उम्मीद जगी है कि अब भविष्य में किसी को करंट से अपनी जान से हाथ नहीं धोना पड़ेगा। अब तक बिजली की जर्जर लाइनें कई जिंदगियों को अपने आगोश में ले चुकी हैं। हरकी पैड़ी गंगा घाट पर करंट की चपेट में आकर 2016 में चार श्रद्धालुओं की मौत को भी ज्यादा वक्त नहीं गुजरा है। कुंभनगरी में बिजली की लाइनों की स्थिति ठीक नहीं है। किसी के घर के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है तो किसी के घर से खंभा सटा हुआ है।
गली- मोहल्लों में बिजली के झूलते तार साफ देखे जा सकते हैं तो कहीं- कहीं नंगी तार हादसे की वजह बनकर उभरी हैं। अक्सर कोई न कोई इन नंगी या जर्जर लाइन की चपेट में आकर किसी अपने को खो देता है या फिर अंगभंग का दर्द ताउम्र सालता है। यही नहीं हरकी पैड़ी के गंगा घाट पर घटी हृदय विदारक घटना ने तो हर किसी को हिलाकर रख डाला था।
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महिला घाट के पास गंगा में नहा रहे अलीगढ़ यूपी के चार दोस्तों में से तीन की जान करंट की चपेट में आने से चली गई थी, तो गंगा सभा कार्यालय से चंद कदम की दूरी पर बिजली के खंभे में दौड़े करंट ने मुजफ्फरनगर की एक महिला को लील लिया था। इन घटनाओं ने जिला प्रशासन के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींची थी। अब बिजली की लाइन भूमिगत होने से संभवत: इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी, इसकी उम्मीद जगी है।
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संवेदनशील है हरकी पैड़ी क्षेत्र
हरकी पैड़ी संवेदनशील इसलिए है क्योंकि वहां देश- विदेश के श्रद्धालु आते हैं। शाम को हरकी पैड़ी को जगमग करने के लिए ढेरों लाइट की व्यवस्था की गई है। हरकी पैड़ी सुंदर और आकर्षक लगे इसके लिए सैकड़ों लाइट लगी हैं लेकिन इन्हें जगमग करने की व्यवस्था जुगाड़ से भी की गई है। ऐसे में यह सबसे संवेदनशील क्षेत्र भी है। आधी- अधूरी व्यवस्था काल बनकर सामने खड़ी है।
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