फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छह महीने बीते, निर्णय न ले पाई विद्वत परिषद

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
छह महीने पहले दोफाड़ हुए धर्म महामंडल के एक मंच पर आने के आसार खत्म हो चुके हैं। महामंडल के बड़े समूह ने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को ज्योतिर्पीठ के शंकराचार्य की मान्यता दे दी है। इतना ही नहीं महामंडल ने स्वयं स्वामी स्वरूपानंद का अभिषेक शंकराचार्य के रूप में कराया। उच्च न्यायालय की ओर से दिए समय के छह महीने बाद भी विद्वत परिषद शंकराचार्य पद पर अपना पक्ष सामने नहीं रख पाई है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ज्योतिर्पीठाधीश्वर पद के दोनों दावेदारों स्वरूपानंद सरस्वती एवं वासुदेवानंद सरस्वती को पद मुक्त करते हुए धर्म महामंडल को आदेश दिया था कि वह तीन महीने में धर्मसम्मत प्रत्याशी का चयन करे। धर्म महामंडल तीन महीने बीतने पर भी काशी विद्वत परिषद के साथ मिलकर कोई निर्णय नहीं ले पाए। उधर, उसी दौरान धर्म महामंडल दो फाड़ हो गया। मंडल के बड़े दल ने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का ज्योतिर्पीठाधीश्वर के रूप में अभिेषक करा दिया। ऐसा हुए करीब आठ महीने बीच चुके हैं। बाद में शेष बचे धर्म महामंडल और काशी विद्वत परिषद के धड़े ने देश भर से आवेदन पत्र आमंत्रित किए। बताया गया कि इन्हीं में से किसी एक का चयन ज्योतिर्पीठाधीश्वर के रूप में किया जाएगा। परिषद के 85 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से एक महिला संत सहित 52 संतों का चयन साक्षात्कार के लिए किया गया। साक्षात्कार के लिए देश भर के 11 विद्वानों की ाविद्वत परिषद भी अलग से तैयार की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

यह सब घटनाक्रम चले छह महीने से अधिक का समय बीत चुका है। महामंडल और परिषद अभी तक भी कोई निर्णण नहीं दे पाए। तब से स्वामी स्वरूपानंद देश भर में भ्रमण कर ज्योतिर्पीठाधीश्वर के रूप में प्रवचन कर रहे हैं। शंकराचार्य के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि देश भर का धर्म समाज स्वरूपानंद को शारदा और ज्योर्ति दोनों पीठों का शंकराचार्य मनता है। वे दोनों स्थानों का कार्यभार भी वर्षों से संभालते आ रहे हैं। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी ज्योतिर्पीठाधीश्वर स्वरूपानंद महाराज बदरीनाथ जाएंगे। पूरे उत्तरी भारत में अनेक धर्मसभाओं को वे संबोधित करेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें