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चुनाव में हुक्का चौपाल की अह्म भूमिका

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धनौरी। लोकसभा चुनाव के प्रचार के जोर पकड़ते ही देहात में हुक्का चौपालों का दौर भी शुरू हो गया है। कई दिन देर रात तक चलने वाली इन चौपालों में राजनीतिक चर्चा के बाद किसी एक प्रत्याशी के भाग्य का फैसला किया जाता है।
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देहात में हुक्का चौपालों का हर चुनाव में महत्वपूर्ण योगदान होता है। जिला पंचायत, विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले हर गांव में हुक्का चौपाल लगने लगती हैं। इस बार भी चुनावी सरगर्मियों के साथ ही देहात क्षेत्र में ऐसी चौपालों का दौर शुरू हो गया है। शाम ढलते ही गांव के बुजुर्ग और नौजवान किसी बड़े घेर में बैठते हैं। इसके बाद चाय की चुस्की और हुक्के की गुड़गुड़ाहट के साथ शुरू होती है राजनीतिक चर्चा। चुनाव मैदान में उतरे प्रमुख प्रत्याशियों को लेकर ग्रामीण चर्चा करते हैं। इनकी कमियां और खूबियां गिनाई जाती हैं। यह चर्चा कई दिन तक चलती है और मतदान से एक दिन पहले रात को किसी एक प्रत्याशी के नाम पर सहमति बनती है और अगले दिन उसके पक्ष में मतदान किया जाता है।
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प्रत्याशी लेते हैं टोह
रात के समय होने वाली इन चौपालों में किसके नाम पर सहमति बनने के आसार हैं यह जानने के लिए चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशी अपने समर्थकों को टोह लेने के लिए भेजते हैं। चुनाव परिणामों का विश्लेषण करने और संभावना तलाशने के लिए कई लोग इन चौपालों में शामिल होते हैं।
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नमक लोटा लेकर लेते हैं संकल्प
मतदान की पहली रात को जब किसी एक प्रत्याशी के नाम पर सहमति बनती है तो नमक लोटा का संकल्प भी दिलाया जाता है। पानी भरे लोटे में नमक डालकर चौपाल में मौजूद सभी लोग संकल्प लेते हैं कि मैं और मेरे परिवार के सभी लोग फलां प्रत्याशी के पक्ष में ही मतदान करेंगे।
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