ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रवर्तक मेधा पाटकर ने कहा कि देश की हर नदी गंगा कहलाई जानी चाहिए। गंगा की विशेषता केवल धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक और प्राकृतिक भी है। खेती को बांधा जाए और भूजल को संवारा जाए तो नदियों को बांधने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हमें प्रकृति की कीमत लगाना छोड़ देना चाहिए। नदियों के संरक्षण के लिए जनभागिता के साथ जन आंदोलन किया जाएगा, जिसकी रणनीति बनाई जा रही है।
नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रवर्तक मेधा पाटकर शनिवार को जगजीतपुर स्थित मातृसदन आश्रम में गंगा की रक्षा और स्वामी सानंद की मांगों के समर्थन में आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि आज प्रयागराज में हो रहे कुंभ में लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। आजकल बच्चे पर्यावरण परिवर्तन की बात तो करते हैं, लेकिन बांधों से हो रहे नुकसान की बात नहीं करते। उन्होंने कहा कि कछार के विनाश के कारण ही नदियों का विनाश हो रहा है। गंगा के बारे में सबसे ज्यादा जानने वाले स्वामी सानंद की हत्या कर दी गई। संत गोपालदास गायब हैं, ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद अनशरत हैं। पर्यावरणविद एवं जल संसाधन विशेषज्ञ रवि चोपड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय गंगा नदी प्राधिकरण में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में संतों और आम आदमी को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी को ड्राफ्ट का अध्ययन कर सांसदों के माध्यम से अपनी आपत्ति को सरकार तक पहुंचाया जाना चाहिए। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि गंगा की रक्षा के लिए रणनीति बनाई जा रही है। जैसी योजना बनेगी उसी के अनुरूप आंदोलन किया जाएगा। बनारस डीआर महिला महाविद्यालय के प्राचार्य मोहम्मद आरिफ ने कहा कि गंगा नदी सभी धर्मों की है। इस्लाम में नदियों का काफी महत्व है। यहीं नहीं जल को स्वच्छ रखने के इस्लाम में सख्त निर्देश भी दिए गए हैं। हजरत मोहम्मद ने भी पानी को न रोकने, पानी का व्यापार न करने और पानी को स्वच्छ रखने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह गंगा हिंदुओं के लिए पवित्र है, उसी तरह मुस्लिम और सभी धर्म के लोगों के लिए भी गंगा वही स्थान रखती है। गंगा के संरक्षण के लिए सभी धर्मों को आगे आना चाहिए। देर शाम पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी मातृसदन पहुंचकर गंगाप्रेमियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का गंगा प्रेम बेनकाब हो चुका है। इस दौरान मधु झुनझुनवाला, पल्लवी जोशी, नंद किशोर, अनिल गौतम, भरत झुनझुनवाला, विमल भाई, सुमित, उमा, राज मौर्य, मुकेश कुमार, सुधांशु कुमार, संजय कुमार, गोविंद सिंह, संजय सिंह, विश्व दीपक त्रिपाठी, यश्वी सिंह, लोकेश कुमार, देवेंद्र भंडारी, अजीत पांडे, पीसी तिवारी, रामवीर राणा, चेतन उपाध्याय, दीपक कोठारी, गोपाल कृष्ण, बीके झा, प्रकाश नौटियाल, सुशीला भंडारी, बीना उपाध्याय सहित अन्य गंगा भक्त मौजूद रहे।