हरिद्वार।
उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के चेयरमैन योगेंद्र खंडूड़ी ने कहा कि शिक्षा के अधिकार के तहत अभी 14 वर्ष तक के बच्चों को निशुल्क शिक्षा का प्रावधान था, अब केंद्र सरकार 18 वर्ष का प्रावधान करने जा रही है, ताकि गरीब तबकों के बच्चे इंटर तक की पढ़ाई कर सकें। उन्होंने उत्तराखंड स्कूल भवनों की स्थिति पर चिंता जताई। कार्यक्रम में डीएम, सीडीओ, एसडीएम के न पहुंचने पर चेयरमैन ने नाराजगी जताई और प्रमुख सचिव से शिकायत करने की बात कही।
शुक्रवार को ऋषिकुल परिसर के सभागार में उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से शिक्षा का अधिकार एवं बच्चों की सुरक्षा अधिकार विषय पर जागरूकता, प्रशिक्षण, कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में
आयोग के चेयरमैन योगेंद्र खंडूड़ी ने प्रदेश में शिक्षा की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एनसीआरटी के आंकड़ों के अनुसार गणित में टिहरी के कक्षा आठ तक के 50 प्रतिशत, जबकि उत्तरकाशी के 30 और हरिद्वार के 49 प्रतिशत छात्र फेल मिले। उन्होंने अन्य विषयों के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि देश में दस लाख योग्य शिक्षकों की कमी है और जीडीपी तीन प्रतिशत के बजाय छह प्रतिशत किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मैदान से लेकर पहाड़ों तक सरकारी स्कूल भवनों की हालत इतनी बदतर है। उन्होंने विश्व बैंक की शिक्षा के पिछड़ेपन रिपोर्ट की जानकारी देते हुए बताया कि 12 देशों के सर्वे में भारत दूसरे नंबर पर है और देश में पढ़े लिखों में 60 प्रतिशत किसी नौकरी लायक नहीं है, जबकि पुुरुषों के बजाय महिलाएं दो प्रतिशत अधिक योग्य हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल की बात करते हैं, लेकिन 37 प्रतिशत स्कूलों में बिजली की सुविधा नहीं है। तो ऐसे स्कूलों में कैसे कंप्यूटर सीखाया जाएगा। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार बच्चों की सुरक्षा के मानक बताते हुए कहा कि बमुश्किल से 10 प्रतिशत की नियम फालो किए जा रहे हैं। इस दौरान हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई धर्म के धर्मोचार्यों ने शिक्षा को जरूरी बताया। अपर सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी ने योजनाओं की जानकारी दी। इस मौके पर नरेश चौधरी, ऋषिकुल के डायरेक्टर प्रो. एसके जोशी आदि मौजूद थे।
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सौ बच्चों का पालन पोषण करेंगे स्वामी अच्युतानंद
कार्यक्रम में पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अच्युतानंद महाराज ने जनपद में शिक्षा सुधार को आवश्यक सुझाव देते हुए निर्धन तबके के 100 बच्चों को गोद लेकर उनका पालन पोषण व पढ़ाई का खर्च उठाने की घोषणा की। उन्होंने सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति में किसी एक स्कूल का जीर्णोद्वार करने की भी घोषणा की।