अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
इस महीने के आखिरी दिन माघ शुक्ल पूर्णिमा को खग्रास चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। ज्योतिषियों के अनुुसार यह ग्रहण पूरे डेढ़ सौ वर्ष बाद आया है। इस चंद्र ग्रहण को लाल-नीला चंद्र ग्रहण भी दुनिया भर में कहा जाता है। यह चंद्र ग्रहण सायंकाल सूर्य उगते ही प्रारंभ होगा और पूरी दुनिया में नजर आएगा।
वर्तमान नववर्ष का यह पहला और बीते रहे संवत का आखिरी ग्रहण है। आमतौर पर चंद्र ग्रहण आंशिक होते आए हैं। यह चंद्र ग्रहण पूर्ण है, जिसे ज्योतिष की भाषा में खग्रास चंद्र ग्रहण कहा गया है। ग्रहण लगने पर चंद्रमा का रंग लाल और नीला दिखाई देने लगेगा। धीरे-धीरे चंद्रमा ग्रस्त हो जाएगा। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार यह ग्रहण एशिया, यूरोप, रशिया तथा अमेरिका में भी पूर्ण दिखाई देगा। भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण सायं 5.18 बजे शुरू होगा। रात 8.41 बजे चंद्रमा को ग्रहण से पूर्ण मुक्ति मिल जाएगी। ग्रहण का खग्रास काल सायंकाल 6.21 बजे से 7.38 बजे तक रहेगा। भारत के सभी भागों में यह ग्रहण दिखाई देगा। डा. मिश्रपुरी ने बताया कि इस ग्रहण का सूतक 31 जनवरी को प्रात:काल सूर्य उगते ही लग जाएगा। सवेरे 8.18 बजे पूर्ण सूतक लगेगा। ग्रहण स्पर्श काल के समस से मुक्ति तक गंगा आदि पवित्र नदियों के तटों पर दानपुण्य स्नान आदि चलता रहेगा। इस दिन तमाम मंदिरों के कापट ग्रहण से 12 घंटे पूर्व बंद कर दिए जाएंगे। रात्रि में ग्रहण मुक्ति के बाद मंदिरों की धुलाई होगी और रात में ही आरती उतारी जाएगी। सायंकाल हरकी पैडी होने वाली गंगा की आरती भी नहीं होगी। यह आरती ग्रहण मुक्ति के बाद रात्रि में आयोजित की जाएगी।
डा. मिश्रपुरी ने बताया कि 150 वर्ष पहले 31 मार्च 1866 को ऐसा लाल-नीला ग्रहण दिखाई पड़ा था। खग्रास होने से धरती पर ग्रहण का पूरा असर पड़ने वाला है। विभिन्न राशियों के हिसाब से अलग-अलग असर पड़ेेगा। यह ग्रहण पुष्य और अश्लेषा नक्षत्रों तथा कर्क राशि में पड़ेगा। इन रशियों और नक्षत्रों में पैदा हुए होंगे, वे कष्ट मानेंगे। ग्रहण के ताप से मुक्ति पाने के लिए छाया दान सर्वश्रेष्ठ है।