अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। अमृत परियोजना के कार्य में गुणवत्ता को तार-तार करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। तुलसी चौक से देवपुरा- ऋषिकुल तिराहे तक सीवर लाइन डालने के बाद डाले जा रहे आरबीएम के स्थान पर बोल्डर डाला जा रहा है, जबकि आरबीएम में मोटा रेत तथा छोटे-छोटे व कटे हुए पत्थर डालने होते हैं। इसके साथ ही वायब्रेट के साथ पानी डाला जाना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है।
देवपुरा क्षेत्र के दुकानदारों का कहना है कि भराव में गोल पत्थर का बोल्डर डाला जा रहा है और उस पर भी पानी नहीं डाला जा रहा है। उनको डर है कि गुणवत्ता को तार-तार कर बनाई जा रही सड़क बरसात में धंस जाएगी। इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा। कांवड़ यात्रा के मद्देनजर इस मुख्य सड़क को ठीक कराने का डीएम ने दबाव बना रखा है। अमृृत के परियोजना प्रबंधक के वेतन भुगतान पर भी उन्होंने रोक लगा दी थी। इसके बाद खोदी गई मुख्य सड़क को बनाने के काम तेजी आई है और तेजी में गुणवत्ता को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सड़क बनाने में पहली लेयर रिवर बेड मैटरीयल की ही डाली जाती है। जिसको आरबीएम कहते हैं। इसके ऊपर कटा हुआ पत्थर, हल्की मिट्टी की लेयर डाली जाएगी, जो बारिश में बहकर सेट हो जाएगी और 20 सितंबर के बाद बिटमिन का काम कराया जाएगा। फिर भी वह इसको दिखवा लेंगे कि आरबीएम सही डाला जा रहा है या नहीं। - संजय सिंह परियोजना प्रबंधक अमृत