उत्तराखंड में भारी तबाही के बावजूद गंगा मैया के भक्तों के जोश में कोई कमी नहीं हुई है। हरिद्वार में गंगा दशहरा के मौके पर लाखों श्रद्घालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई है।
सोमवार रात से इस इलाके में बारिश बंद हुई है, लेकिन खतरा अभी नहीं टला है। गंगा अभी भी खतरे के निशान 1.2 मीटर ऊपर बह रही है।
इस बीच गंगा दशहरा स्नान के लिए लाखों लोग हरिद्वार पहुंचे। गंगा का जल स्तर बढऩे के बावजूद कई घाटों पर स्नान की व्यवस्था प्रशासन ने की है। श्रद्धालुओं को घाटों पर ज्यादा समय रुकने नहीं दिया जा रहा।
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हरकी पैड़ी सहित विभिन्न घाटों के प्लेटफार्मों पर पानी है, सड़के क्षतिग्रस्त और हाइवे बाधित हैं। इस आपदा के बावजूद भी धर्मनगरी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।
गंगा दशहरा पर हरिद्वार के तमाम घाटों पर हर-हर गंगे का जयघोष गूंज रहा है। आपदा पर आस्था भारी पड़ती नजर आई।
प्रशासन के अनुसार मंगलवार सुबह 11 बजे तक सात से आठ लाख श्रद्धालुओं के स्नान का अनुमान है। अभी भी घाटों पर स्नान करने वालों की भीड़ उमड़ रही है। बाढ़ के खतरे को देखते हुए सभी घाटों पर सुरक्षा कर्मी तैनात हैं।
श्रद्धालुओं को ज्यादा समय घाट पर नहीं बिताने दिया जा रहा है। डुबकी लगाकर श्रद्धालुओं को ऊपर सुरक्षित क्षेत्र में भेजा जा रहा है। हरकी पैड़ी, सुभाष घाट, मालीवय द्वीप, कुशावर्त घाट आदि प्रमुख गंगा घाट श्रद्धालुओं से खचाखच भरे हैं।
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रोजाना की तरह धार्मिक कर्मकांड भी आयोजित हो रहे हैं। रोडवेज स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों की भारी भीड़ है। दरअसल, सोमवार को अमृतसर जनशताबदी एक्सप्रेस, गंगानगर तथा लाहौरी एक्सप्रेस रद्द होने से भी हरिद्वार में हजारों की संख्या में श्रद्धालु फंसे हैं।
गंगा दशहरा
आज वही पावन दिन है जब गंगा पृथ्वी पर आयी थी। इसलिए प्रतिवर्ष गंगा अवतरण दिवस को गंगा दशहरा के नाम से मनाया जाता है। इस दिन गंगा नदी में स्नान करके गंगा मैया की पूजा अर्चना एवं दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
रोचकः गंगा दशहरा के विषय में मान्यता है कि इस दिन बालों की एक लट काटकर गंगा में प्रवाहित करने से बाल स्वस्थ रहते हैं और लंबे होते हैं।