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यहां खुलेगा मौत के 'खेल' का राज

Thu, 06 Jun 2013 01:36 PM IST
ब्यूरो
अब बोतलों में बंद मौत का राज उत्तराखंड में ही खुल जाएगा। देहरादून स्थित उत्तराखंड पुलिस की फोरेंसिक लैब में बिसरा जांच शुरू कर दी गई है।


अब तक विभिन्न जनपदों से वहां 15 सैंपल भेजे जो चुके हैं, जिनकी जांच चल रही है। अब तक बिसरा जांच आगरा और लखनऊ स्थित यूपी पुलिस की लैब में हुआ करती थी।

जिनकी रिपोर्ट आने में सालों का समय लग जाता था। लगातार आधुनिक हो रही उत्तराखंड पुलिस ने एक और बड़ी उपलब्धि की ओर कदम बढ़ाया है। देहरादून स्थित विभाग की फोरेंसिक लैब में बिसरा परीक्षण शुरू कर दिया गया है।

कुछ दिन पूर्व शुरू हुए बिसरा परीक्षण के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट्स को विशेष ट्रेनिंग दिलवाई गई है। बताया जा रहा है कि बिसरा जांच की रिपोर्ट लंबे समय तक पेंडिंग पड़े रहने को लेकर कोर्ट ने भी पुलिस को फटकार लगाई थी। जिसके चलते पुलिस को जल्द ही फोरेंसिक लैब में बिसरा जांच की व्यवस्था करवानी पड़ी।



क्या है बिसरा जांच
बिसरा जांच के लिए मृतक के शरीर से किडनी, लीवर, पेट और स्पलीन के कुछ हिस्से सैंपल के तौर पर लिए जाते हैं। जिन्हें एक कांच के जार में केमिकल में रखकर परीक्षण के लिए भेजा जाता है।

जब किसी की मौत की वजह सामने नहीं आती और उसे जहर दिए जाने की आशंका होती है तो पोस्टमार्टम के वक्त बिसरा सैंपल लिया जाता है। इस बिसरा की फोरेंसिक लैब में केमिकल जांच के बाद पता लगाया जाता है कि शरीर में जहर है या नहीं।

ये भी पता लगाया जाता है कि कौन सा जहर है और कब शरीर में गया। सामान्य तौर पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले 8 से10 प्रकार के जहर के लिए बिसरा जांच की जाती है।
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देहरादून में जांच से होंगे कई फायदे
देहरादून स्थित फोरेंसिक लैब में बिसरा जांच शुरू हो गई है। इससे कई फायदे होंगे। बिसरा जांच के लिए जल्द ही लैब पहुंच जाएगा। जिससे उसमें मौजूद जहर की मात्रा या प्रभाव कम नहीं होगा। जिसे आसानी से जांच में पाया जा सकेगा। जबकि अब तक लंबा समय लग जाने से जहर की मात्रा और प्रभाव दोनों खत्म हो जाते थे। जिससे जांच रिपोर्ट में जहर की पुष्टि नहीं हो पाती थी।
- डॉ. सदानंद दाते, एसएसपी नैनीताल
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