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मार्कशीट हाथ में लेकर भावुक हुए बिटिया के पिता

Wed, 13 Mar 2013 01:20 AM IST
आफताब अजमत/देहरादून
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एक दिन मेरी उदासी दूर करने को उसने कहा था कि पापा देख लेना बहुत जल्द मैं जिम्मेदारियों में आपका हाथ बटाऊंगी।
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लेकिन किसे पता था कि वह इतनी दूर चली जाएगी कि उसे देख भी नहीं पाएंगे। ऐसी जिंदादिल बिटिया को पाकर हम हमेशा गर्व का अनुभव करते थे...।

रुंधे गले से यह लफ्ज बोलते-बोलते पिता की आंखों में आंसू आ गए। देश दुनिया में महिला सुरक्षा की अलख जगाने वाली बहादुर बिटिया की मार्कशीट लेने के लिए मंगलवार को पिता अपने बेटे के साथ इंस्टीट्यूट पहुंचे थे।

बहादुर बिटिया के पिता ने बताया कि उन्हें शुरू से ही दिल्ली से बेहतर देहरादून लगता था। यहां के अच्छे माहौल को देखकर ही बिटिया को अकेले पढ़ने भेजा था। जब वह उससे मिलने आते थे तो अक्सर राजपुर रोड पर पैदल घूमा करते थे।
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जैसे ही संस्थान के चेयरमैन हरीश अरोड़ा ने उन्हें मार्कशीट दी तो बेहद भावुक लहजे में उन्होंने कहा कि बिटिया के नंबर देखकर बहुत गर्व हो रहा है लेकिन आज वह हमारे बीच नहीं है, इसका बेहद गम है।
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इस मौके पर संस्था की वाइस चेयरमैन रानी अरोड़ा और प्रशासनिक अधिकारी अरविंद सिंह मौजूद रहे।

बिटिया की फीस बनेगी प्रतिभाओं का सहारा
बहादुर बिटिया की फीस वापस लेने से मना करते हुए पिता ने घोषणा की कि वह हर साल एक प्रतिभाशाली छात्रा का नाम संस्थान को भेजेंगे। बिटिया की फीस में से कुछ हिस्सा बतौर स्कॉलरशिप उस प्रतिभाशाली छात्रा को दिया जाएगा। 'अमर उजाला' ने पहले ही इसका खुलासा किया था।

बिटिया का रिपोर्ट कार्ड
पेपर 1----------------124/200
पेपर 2----------------147/200
पेपर 3----------------151/200
पेपर 4----------------144/200
पेपर 5----------------74/100
पेपर 6----------------160/200
अंतिम वर्ष के अंक-----800/1100
कुल अंक--------------2323/3400
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