विजिलेंस ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के अधिकारियों द्वारा कई करोड़ की छात्रवृत्ति हड़पने की साजिश का भंडाफोड़ करते हुए एक जालसाज को गिरफ्तार किया है। नैनीताल और उत्तरकाशी में यूनिवर्सिटी के चेयरमैन और कारपोरेशन बैंक गाजियाबाद के प्रबंधक समेत छह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
कुमाऊं क्षेत्र में करीब साढ़े चार करोड़ की राशि अवमुक्त नहीं हो पाई थी, लेकिन गढ़वाल से तीन लाख रुपये जारी कर दिए गए थे, जिन्हें खाते सीज कर बचा लिया गया है।
विजिलेंस के डायरेक्टर अशोक कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एसके दिवाकर ने ईमेल के जरिए फर्जी छात्र दर्शाकर छात्रवृत्ति हड़पने की शिकायत की थी। विजिलेंस नैनीताल के निरीक्षक अरविंद डंगवाल और देहरादून के विशेष कार्याधिकारी अर्जुन सिंह रावत से आरोपों की गोपनीय जांच कराई गई।
बैंक के प्रबंधक से सांठगांठ कर छात्र-छात्राओं के खुलवाए खाते
जांच में आया कि कुमाऊं एवं गढ़वाल परिक्षेत्र में मेवाड़ यूनिवर्सिटी चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) के अधिकारियों ने उत्तराखंड के कुछ लोगों की सांठगांठ से दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के करोड़ों रुपये हड़पने का प्रयास कर रहे हैं।
अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों का कथित रूप से मेवाड़ यूनिवर्सिटी में प्रवेश दर्शाकर छात्रवृत्ति पाने के लिए समाज कल्याण विभाग को सूची भेज दी थी।
जांच में पता चला कि छात्र और छात्राएं कॉलेज तक नहीं गए है। यूनिवर्सिटी के डीन राधा कृष्ण द्वारा शपथ पत्र दिया गया कि किसी भी त्रुटि के लिए यूनिविर्सिटी जिम्मेदार होगी।
विजिलेंस डायरेक्टर ने बताया कि यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने गाजियाबाद की वसुंधरा शाखा के कारपोरेशन बैंक के प्रबंधक से सांठगांठ कर छात्र-छात्राओं के खाते तक खुलवा दिए थे।