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केदारनाथ मंदिर में पड़ी दरारें, गर्भगृह सुरक्षित

Tue, 16 Jul 2013 07:43 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
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उत्तराखंड में 16 जून को हुई तबाही ने करीब 1200 साल पुराने केदारनाथ मंदिर में कई दरारें डाल दी हैं।
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भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई) की टीम ने बाढ़ से मंदिर को हुए नुकसान का शुरुआती आकलन करने के बाद यह खुलासा किया है। हालांकि मंदिर का गर्भगृह पूरी तरह सुरक्षित है।

मंदिर के जीर्णोद्धार का जिम्मा एएसआई को सौंपा गया है। 11 जुलाई को देहरादून से एएसआई की तीन सदस्यीय टीम ने केदारनाथ जाकर सर्वे किया।

टीम ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट दिल्ली स्थित मुख्यालय को सौंप दी है। इसमें कहा गया है कि गर्भगृह को कोई खास नुकसान नहीं दिख रहा है।

एएसआई के देहरादून सर्किल के अधिकारी अतुल भार्गव ने बताया कि सबसे ज्यादा नुकसान मंडप के पूर्वी हिस्से को हुआ है। ईशान मंदिर तो बाढ़ में पूरी तरह से ही बह गया।
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मंदिर के पश्चिमी द्वार और गर्भगृह के बाहरी हिस्से से कई पत्थर भी अपनी जगह से हट गए हैं।

हालांकि उन्होंने कहा कि नुकसान का सही आकलन वहां से पूरा मलबा हट जाने के बाद ही हो सकता है। वहां अब भी 2 से छह फुट तक मलबा है।

एएसआई के देहरादून सर्किल से आरके सिंह, मनोज जोशी और वाईएस नयाल ने मंदिर का दौरा किया था।

वहीं, एएसआई में सहायक महानिदेशक डॉ. बीआर मणि ने कहा कि यह शुरुआती आकलन है, सही तस्वीर विशेषज्ञ टीम के दौरे के बाद ही साफ होगी।

मणि केदारनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए गठित एएसआई टीम के प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि यह कहना फिलहाल मुश्किल है कि मंदिर के भवन को दुरुस्त करने में कितना वक्त लगेगा।

मालूम हो कि 16 जून को आई बाढ़ ने केदारनाथ में भयावह तबाही मचाई थी, यहां मंदिर को छोड़कर बाकी सब तबाह हो गया था।
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