उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की कहानी 12 करोड़ रुपये की लागत से तीन साल पहले खरीदी गई मशीनें बयां कर रही हैं।
अभी तक इन मशीनों की पैकिंग तक नहीं खुली है, इसके पीछे विभाग रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने का तर्क दे रहा है। पर उन मरीजों का क्या जो इन मशीनों के होते हुए बाहर से कई गुना ज्यादा कीमत देकर टेस्ट कराने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य विभाग ने करीब तीन वर्ष पूर्व हल्द्वानी, पौड़ी और रुड़की अस्पताल के लिए सीटी स्कैन मशीन खरीदी थी।
हर मशीन की कीमत करीब चार करोड़ रुपये है। इन मशीनों के आने से स्थानीय मरीजों को राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन यह मशीनें करीब तीन साल बीतने के बाद भी डिब्बे से बाहर नहीं निकल पाई हैं। इसके पीछे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से इन मशीनों का संचालन नहीं हो पा रहा है।
हालांकि सवाल यह भी उठ रहे हैं कि मशीन खरीदने से पहले सरकार ने रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था क्यों नहीं की। इस पूरे मामले में खरीद में कमीशनखोरी की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
डिजिटल एक्सरे मशीन भी बंद
रुड़की में सीटी स्कैन मशीन के साथ ही डिजिटल एक्सरे मशीन भी खरीदी गई थी। लेकिन यह मशीन भी आज तक उपयोग में नहीं लाई जा सकी है। इसके चलते मरीजों को लाखों की मशीन का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
खराब मशीन कैसे होगी ठीक
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मशीनों की वार्षिक मरम्मत और रख-रखाव के लिए जारी होने वाली रकम दबाए बैठे हैं। इसके चलते मशीनें ठीक नहीं हो पा रही है। अल्मोड़ा में सीटी स्कैन मशीन खराब पड़ी है। इसके मेंटनेंस के लिए कंपनी से करार हुआ है। लेकिन स्वास्थ्य महानिदेशालय के स्तर से बजट जारी नहीं हो पा रहा है।
प्राइवेट में व्यवस्था नहीं होने से लोगों को मजबूरी में हल्द्वानी का रुख करना पड़ रहा है। इस बारे में संयुक्त निदेशक डा. मनु जैन का दावा है कि पिछले माह ही मशीन ठीक करवाई गई है। इसके बाद मशीन खराब होने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
दो मशीन खरीदने की तैयारी
तीन मशीनों को तीन साल बाद भी शुरू ना करवा पाने वाले विभाग ने दो और मशीनों को खरीदने की तैयारी कर ली है। विभागीय अधिकारियों ने कोटद्वार और उत्तरकाशी के लिए भी करीब चार करोड़ कीमत की मशीन को खरीदने का प्रस्ताव बनाया है। बताया जा रहा है कि शासन स्तर पर इसकी कवायद लगभग फाइनल हो चुकी है। इस पूरी खरीद के पीछे लाखों रुपये के कमीशन का खेल बताया जा रहा है।
कई जगह हमने मशीनें और सामान खरीदे लेकिन उनकी पैकिंग तक नहीं खुलने की जानकारी मुझे भी मिली है। दरअसल स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं होने के कारण यह दिक्कत हो रही है। इसकी व्यवस्था बनाने की कोशिश हो रही है।
- डा. कुसुम नरियाल, स्वास्थ्य महानिदेशक