चंपावत। पांच दशक के संघर्ष के बाद सूखीढांग-डांडा-मीडार (एसडीएम) मोटर मार्ग का निर्माण हुआ, पर यह मार्ग अभी भी कच्चा और बेहद खराब हाल में है। मगर अब इस मार्ग के दिन बहुरने वाले हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 28 फरवरी को चंपावत दौरे में इस मार्ग के डामरीकरण का एलान किया। जिला प्रशासन उनके एलान को धरातली स्वरूप देने के लिए प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने पर एसडीएम रोड के डामरीकरण होने से टनकपुर से चंपावत के बीच अच्छा वैकल्पिक मार्ग तो मिलेगा ही, साथ ही सिख तीर्थ स्थली रीठा साहिब का 70 किमी की ये दूरी कम हो जाएगी। रीठा साहिब का जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर से 150 किलोमीटर का फासला घटकर अब 80 किमी रह गया है। इस मार्ग का लाभ तीर्थयात्रियों के अलावा 21 गांव के पांच हजार से अधिक लोगों को भी हो रहा है।
आसान होगी यात्रा
एसडीएम रोड पर डामरीकरण होने से ग्रामीणों को लाभ होगा। इस सड़क के बनने से लधिया और तल्लापाल के लोगों की मैदानी क्षेत्र टनकपुर से पहुंच सुगम हुई है। -शंकर दत्त जोशी एसडीएम रोड निर्माण को बनी संघर्ष समिति के नेता
भाड़े में आएगी कमी
डामर होने के बाद इस रोड से लोगों के भाड़े में भी कमी आएगी। साथ ही फल, जड़ी-बूटियां और अन्य सामान को मंडी तक पहुंचाने की सुविधा भी मिलेगी। - पवन देउपा सामाजिक कार्यकर्ता
इन गांवों की आवाजाही होगी सुगम
सूखीढांग, गेरलेख, चौड़ाकोट, धुरा, पातल, मथियाबांज, तलियाबांज, बकोरिया, बुड़म, कल्लाड़, डांडा, कठौती, ककनई की धार, मल्ली टांण, तल्ली टांण, साल, मछियाड़, तलाड़ी, कुल्यालगांव, चौड़ामेहता और रीठा साहिब।
मुख्यमंत्री द्वारा एसडीएम रोड के डामरीकरण के एलान के बाद अब जिला प्रशासन इसे लेकर प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इस प्रस्ताव को शासन को भेजा जाएगा।
सुरेंद्र नारायण पांडेय,
डीएम, चंपावत।