जिले के पंचेश्वर में स्थित बहुप्रतीक्षित पंचेश्वर बांध निर्माण को लेकर भले ही बीते पांच साल में चर्चाओं और अटकलों का बाजार गर्म रहा हो लेकिन यहां नौ दिन चले अढ़ाई कोस की कहावत चरितार्थ हो रही है। लोकसभा चुनाव की रणभेरी बजने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जाने वाले प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के निर्माण की गतिविधियां हाशिए में चली गई हैं। बीते पांच सालों में बांध निर्माण की आस लगाए लोगों ने जहां किसी भी तरह के नवनिर्माण कार्यों पर स्वयं ही रोक लगाई हुई है वहीं डूब क्षेत्र के गांवों में सरकारी विकास और निर्माण कार्यों में अघोषित रोक लगी हुई है।
दूसरी ओर बीते पांच सालों में पंचेश्वर बांध के विस्थापन और पुनर्वास की कोई ठोस कार्ययोजना तक नहीं बन सकी है। इस संबंध में पंचेश्वर बांध प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक गोयल के अनुसार वाप्कोस कंपनी की ओर से तैयार की गई बांध परियोजना की डीपीआर में ढाई सौ से अधिक आपत्तियां आईं थीं। ये आपत्तियां बांध की ऊंचाई, उसके हाइड्रोलॉजिकल डिजाइन और अन्य तकनीकी विवरणों जैसी चीजों को लेकर थीं जिन्हें दूर कर लिया गया है। अब केवल बांध की लागत, बिजली और पानी के बंटवारे जैसे कुछ गैर तकनीकी मसले का निपटारा होना बाकी है।
कई दशकों से प्रस्तावित है पंचेश्वर बांध
चंपावत। जिला मुख्यालय से लगभग 82 किलोमीटर की दूरी पर सरयू और काली नदी के संगम स्थल पर पंचेश्वर बांध का बनना कई दशकों से प्रस्तावित है। लगभग सौ हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले पंचेश्वर बांध से जहां 6480 मेगावाट बिजली पैदा किए जाने की संभावना है। वहीं 315 मीटर की ऊंचाई तक बनने वाले इस बांध से भारत और नेपाल का लगभग 25 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जलमग्न होगा। प्रस्तावित बांध में गांवों के डूबने से दोनों ही देशों के लगभग 39 हजार लोग प्रभावित होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्थक प्रयासों से ही नेपाल सरकार ने बांध निर्माण को हरी झंडी दी है। बांध के बनने के बाद राज्य बिजली के संकट से मुक्त होगा और इस बांध के निर्माण से पर्यटन, रोजगार को भी काफी बढ़ावा मिलेगा।
अजय टम्टा, पूर्व केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री।
टिहरी बांध से सबक लेते हुए राज्य में बड़े बांधों का निर्माण ठीक नहीं है। पंचेश्वर बांध के निर्माण से पैदा होने वाली बिजली में स्थानीय लोगों का हक कम होने के साथ ही लोगों को विस्थापन की समस्या से जूझना पड़ेगा।
प्रदीप टम्टा, राज्यसभा सदस्य।