केवीके के प्रोत्साहन से कई लोगों ने खाली जमीन पर अपने लिए शाक-भाजी उगाना शुरू कर दिया है। सुंई के पूर्व फौजी रमेश खर्कवाल ने बेकार पड़े टिनों में उर्वरा मिट्टी डालकर मकान की छत की आड़ में जैविक टमाटर पैदा किए हैं। उनका कहना है कि शीतकाल में यहां पाले से फसलें खराब हो जाती है। छत की आड़ मिलने से टमाटर और अन्य सब्जियां सुरक्षित रह पाती हैं।
केवीके के प्रभारी डॉ. संजय चौधरी ने बताया कि गृह वाटिका के तहत केंद्र द्वारा महिलाओं को न्यूट्रीशियस गार्डनिंग के लिए भी प्रेरित किया गया। हमने सब्जियों के निशुल्क बीज उपलब्ध कराए हैं। महिलाओं में खून की कमी को देखते हुए सब्जियों में पाए जाने वाले विटामिन और अन्य पौष्टिक तत्वों की उपलब्धता के मद्देनजर जूस निकालने का भी प्रशिक्षण दिया गया। गृह विज्ञान की सहायिका गायत्री देवी का कहना है कि अब महिलाएं चुकंदर, गाजर, पालक, टमाटर आदि का जूस निकालकर अपने उपयोग में ला रही हैं। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. सुरेश उप्रेती का कहना है कि इसके सेवन से हीमोग्लोबिन की कमी दूर हो रही है। साथ ही सुबह कच्चे लहसुन के सेवन से रक्तचाप सामान्य रहने के अलावा कोलेस्ट्रॉल पर भी नियंत्रण होता है।