पेयजल संकट ग्रामीण क्षेत्रों में भी गहराने लगा है। चौड़ा राजपुरा ग्राम पंचायत में नौले सूखने की कगार पर है। गांव के लिए बनी पेयजल लाइन में पानी नहीं होने से लोगों की निर्भरता पूरी तरह से नौलों पर है। नौलों के सूखने से महिलाएं अब रात में लालटेन के उजाले में पानी भरने को मजबूर हैं।
जिला मुख्यालय से लगे चौड़ा राजपुरा के ढोलगा तोक में नौले सूखने लगे हैं। ढोलगा तोक के 15 परिवार इसी एकमात्र नौले पर निर्भर हैं। दिन में ये नौला पूरी तरह से सूख जाता है, जिस वजह से यहां की महिलाएं रात में लालटेन के उजाले में पानी भरने को मजबूर हैं। नौले के जंगल से लगे होने के चलते जंगली जानवरों का डर बना रहता है।
इसलिए ये महिलाएं नौले में झुंड बनाकर पानी भरने जाती है। रीता देवी, नीलावती, लक्ष्मी देवी, चंचला देवी, तुलसी देवी आदि महिलाओं का कहना है कि रात में पानी भरने की मजबूरी के चलते उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है। ग्रामीण गोपाल सिंह, प्रताप सिंह, सोनू, आनंद सिंह, चतुर सिंह आदि का कहना है कि पेयजल संकट का कारण असमान जल वितरण है।
उनका कहना है कि चौड़ा राजपुरा पंचायत के लमकनिया, चनौला और मटेला आदि तोक में पेयजल योजना से पानी आता है, लेकिन अकेले ढोलगा तोक के 15 परिवार इससे वंचित है।
स्रोत में गिरावट से गहराया पेयजल संकट
जल संस्थान का कहना है कि ग्राम पंचायत चौड़ा राजपुरा की प्यास बुझाने के लिए बरसों पहले चौड़ाडुमखुरी पेयजल योजना बनाई गई थी। इस पेयजल योजना से 37 कनेक्शन, 33 एकल स्टैंड पोस्ट और 18 सार्वजनिक स्टैंड पोस्ट में पानी की सप्लाई की जाती है, लेकिन इन दिनों पेयजल योजना के स्रोत दुधौरी में पानी कम होने से पेयजल संकट गहरा गया है।