जिला अस्पताल में अपनी बारी का इंतजार करती महिलाएं
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नई सरकार बनने के बाद जिला अस्पताल की व्यवस्था में सुधार के इरादे से विधायक कैलाश चंद्र गहतोड़ी ने अस्पताल का तीन बार दौरा किया। लेकिन अस्पताल की व्यवस्था में खास सुधार नहीं हो सका है। वहीं अब जिला अस्पताल में महिलाओं का इलाज भी नहीं हो पा रहा है। पहली जुलाई से प्रसूति रोग विशेषज्ञ के 45 दिनों के अवकाश में होने से महिला रोगियों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। कई महिलाएं इलाज के बगैर वापस लौटने को मजबूर हो रही हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.एमएल बोहरा ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर 15-15 दिनों के लिए तीन महिला डॉक्टरों को संबद्ध किया था। पहली जुलाई से 15 जुलाई तक तो संबद्ध महिला डॉक्टर ने यहां सेवाएं दी। लेकिन 16 जुलाई से संबद्ध संविदा डॉक्टर मेडिकल में चल दी हैं। इसके चलते अस्पताल में ज्यादातर महिलाओं को इलाज के बगैर वापस लौटने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.आरके जोशी का कहना है कि एलएमओ के तीनों पद खाली हैं। महिला डॉक्टरों की कमी होने से फजीहत बढ़ रही है।
चंपावत जिले को मिला पहला फिजीशियन
चंपावत जिले को पहला फिजीशियन मिल गया है। नवागत फिजीशियन डॉ. एमके सैनी ने यहां जिला अस्पताल में कार्यभार ग्रहण कर लिया है। सितंबर 1997 में जिला बनने के बाद यहां पहली बार किसी फिजीशियन की तैनाती हुई। 20 जून को ऋषिकेश के फिजीशियन के यहां स्थानांतरण के आदेश हुए थे। डॉ.एमके सैनी ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। उनके आने के बाद से मरीजों की आमद बढ़ रही है।