जिला मुख्यालय के मल्लीहाट और फुलारागांव और लोहाघाट नगर के अलावा कर्णकरायत में रामलीला की धूम मची हुई है। चंपावत और लोहाघाट में सीता स्वयंवर की लीला का मंचन हुआ। स्वयंवर में रावण, वाणासुर के साथ जनकपुरी पहुंच गया।
रावण ने जैसे ही धनुष तोड़ने का प्रयास किया तो आकाशवाणी हो गई जिसे सुनकर रावण चला गया। राजाओं की ओर से धनुष न टूटने पर जनक निराश होने लगे। गुरु विश्वामित्र से आज्ञा लेकर राम ने शिव धनुष को उठा लिया। धनुष टूटने की गर्जना से तपस्या में लीन परशुराम क्रोधित होकर जनकपुरी पहुंच गए। क्रोधित होकर परशुराम ने जनक से पूछा ‘किसने तोरा धनुष शंकर का, टूटत ही डोला संसार’।
परशुराम और लक्ष्मण के बीच शानदार संवाद तक की लीला दिखाई गई। परशुराम का अभिनय दीपक तड़ागी ने, विश्वामित्र का कैलाश नाथ ने, रावण का अशोक वर्मा, हनुमान का सुरेश साह ने किया। हीराबल्लभ पलसांई, भगवतशरण राय, विकास साह, नवीन वर्मा, चेतन वर्मा, भार्गव पचौली, अमन वर्मा आदि सहयोग कर रहे हैं। रामलीला के दौरान पुलिस की ओर से विभिन्न कानूनी जानकारियां दी गई। छात्रसंघ अध्यक्ष गौरव पांडेय और मीडिया कर्मियों को सम्मानित किया गया।
लोहाघाट में राम का अभिनय जितेंद्र पुनेठा, लक्ष्मण का नवीन बोहरा, परशुराम का किरन फर्त्याल, जनक का उमेश ओली, विश्वामित्र का जगदीश जोशी ने किया। रामलीला कमेटी अध्यक्ष जीवन मेहता, जीवन गहतोड़ी के संचालन और विपिन वर्मा के निर्देशन में धनुष यज्ञ की लीला को देखने के लिए भारी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। कर्णकरायत की रामलीला में विश्वामित्र जी का दशरथ दरबार में पहुंचने से लीला की शुरुआत की गई।
राम-लक्ष्मण का वन में जाना, ताड़का, सुबाहु का वध करना, राम लक्ष्मण का जनकपुरी में प्रवेश करना, सीता द्वारा गौरी पूजन तक की लीला दिखाई गई। दशरथ का अभिनय प्रकाश मुरारी, विश्वामित्र का दिनेश मुरारी, ताड़का का मदन फर्त्याल, राम का विशाल फर्त्याल, लक्ष्मण का सूरज गड़कोटी, सुबाहु का विकास गड़कोटी ने अभिनय किया। लीला को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। संचालन संजय मुरारी ने किया।