पीपीपी मोड में संचालित अस्पताल में अव्यवस्थाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। यहां न तो डॉक्टरों के आने का समय निर्धारित और नहीं अस्पताल में दवा ही मिल रही है। इन अव्यवस्थाओं के चलते रोगियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है। यहीं नहीं मरीजों से बाजार से दवाएं मंगाई जा रही है।
मंगलवार को ईएनटी, महिला चिकित्साधिकारी, बाल रोग, दंत रोग और दो ईएमओ ही अस्पताल में मौजूद थे, जबकि छह डॉक्टर अनुपस्थित थे। अस्पताल में लंबे समय से रेडियोलॉजिस्ट न होने से गर्भवती महिलाओं और अन्य रोगियों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए प्राइवेट अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। एक्सरे का कार्य पर्यावरण मित्र कर रहा है और रोगियों से बाजारों से दवाएं मंगाई जा रही हैं। मंगलवार को पंचेश्वर, रौंसाल, बाराकोट, किमतोली, चमदेवल आदि स्थानों से रोगी सुबह आठ बजे ही अस्पताल में पहुंच गए थे। लेकिन साढ़े नौ बजे तक अधिकांश डाक्टरों का कोई अता पता नहीं था।
गर्मियों में अस्पताल खुलने का समय सुबह आठ से दो बजे तथा शीतकाल में सुबह नौ बजे से तीन बजे तक निर्धारित किया गया है। अस्पताल की अव्यवस्थाओं के चलते डॉक्टरों के फुर्सत से अस्पताल में आने के कारण रोगियों को काफी इंतजार करना पड़ रहा है।
डॉक्टर न होने पर लगा तीन लाख का जुर्माना
लोहाघाट। सीएमओ डा.विनोद टोलिया का कहना है कि निर्धारित संख्या में डॉक्टर न होने पर उनके स्तर से इस दफा शील प्रबंधन को तीन लाख रुपये का जुर्माना किया गया है। इनके मासिक बिल में यह धनराशि काटी गई है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में पर्याप्त दवाएं होते हुए बाजार से दवाएं मंगाना गंभीर अपराध है, जिसके लिए उनका स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। साथ ही समय से डॉक्टरों की उपस्थिति के लिए सीएमएस को सख्ती से अनुपालन करने के निर्देश दिए गए हैं।