खेतीखान में उत्पादित गोभी के साथ चालक सागर।
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चंपावत। सागर मिश्रा ने कोरोना महामारी की आपदा को अवसर में बदला। हाथों से स्टेयरिंग छूटा, तो उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, बल्कि सोच विचार कर अपने पुश्तैनी व्यवसाय को अपनाया। और अब यह युवा खेती के जरिये सोना उगल रहा है।
खेतीखान कस्बे के सागर मिश्रा के लिए जीप रोजी-रोटी का सहारा था। लेकिन पिछले साल 22 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन से पहिया रुका, तो काम भी थम गया। युवा सागर ने इस वक्त का उपयोग खेती के पुश्तैनी काम को जमाने में किया। पिछले साल उन्होंने चार नाली में गोभी उगाई। अच्छी पैदावार होने के बाद उन्होंने खेती का रकवा बढ़ाया। 15 नाली में उन्होंने फूल गोभी, पत्ता गोभी, आलू, कद्दू, टमाटर, बैगन आदि की खेती की। और इस उत्पादित सब्जी को सागर मिश्रा अपनी जीप से दुकानों में जाकर बेच रहे हैं। इस रकम से उन्हें अच्छा लाभ मिल रहा है।
कोट
खेतीखान के सागर मिश्रा ने लॉकडाउन के दौर में ड्राइविंग को छोड़ खेती में हाथ आजमाए। इस काम को उन्होंने बगैर सरकारी मदद के किया है। उनकी खेती की ये पहल अन्य लोगों के लिए प्रेरणादाई है।
सतीश कुमार शर्मा,
जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।
स्टीयरिंग थामने वाले सागर अब खेतीखान गांव में फसलों को लहलहा रहे।- फोटो : CHAMPAWAT