पाइप लाइनों के लीकेज में बर्बाद हो रहा पानी
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पेयजल की घनघोर कमी के बावजूद पानी को बचाने की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। टैंकरों और पिकप से पानी लाने में मोटी रकम खर्च हो रही है। चंपावत नगर और आसपास की पेयजल लाइनों में ही चार से अधिक लीकेज हैं। इनसे रोजाना हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है।
कोतवाली चबूतरे के नजदीक, सैनीगाड़ स्रोत से करीब 150 मीटर दूरी पर, सैनीगाड़ स्रोत की टंकी से निकलने वाले पानी की लाइन के अलावा सैनीगाड़ स्रोत में लीकेज से खूब पानी बर्बाद हो रहा है। जल संस्थान इन लीकेजों को अब तक ठीक नहीं कर पाया है। इन लीकेजों से करीब 24 हजार लीटर से अधिक पानी बर्बाद हो रहा है। जबकि इतना ही पानी लाने के लिए वाहनों के जरिए हजारों रुपया खर्च हो रहा है। जल संस्थान के जेई एसएस थापा का कहना है कि ये लीकेज उनकी जानकारी में नहीं हैं। जल संस्थान कार्मिकों की टीम भेजकर इन्हें दुरुस्त कराया जाएगा।
लगाए जाएं अधिक से अधिक पेड़
भुवन भट्ट का कहना है कि पेयजल संवद्र्धन करने वाले पेड़ों को अधिक से अधिक लगाया जाए। जंगल को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई हो।
जल संचय बनें आदत का हिस्सा
दिग्विजय सिंह का कहना है कि गांवों की आबादी को देखते हुए छोटी-छोटी योजनाएं बनाई जाएं। साथ ही जल संचय को आदत का हिस्सा बनाया जाए।
पानी बचाने की मुहिम से हो जुड़ाव
सुरेंद्र सिंह का कहना है जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए लोगों को सीधे तौर पर पानी बचाने की मुहिम से जोड़ा जाए। योजनाओं के लीकेज को रोककर पानी बचाए जाए।
संरक्षित हों नौले-धारे
जगदीश प्रहरी का कहना है कि पानी के प्राकृतिक तरीके नौले-धारों को संरक्षित किया जाए। साथ ही अगले 20 साल की आबादी के लिए नई पेयजल योजना बनाई जानी चाहिए।