लोहाघाट में पेयजल किल्लत के चलते नर्सरी गधेरे से पानी ढोते बच्चे।
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क्षेत्र में दिनों-दिन पेयजल संकट गहरा रहा है। पेयजल स्रोतों में लगातार कमी आने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोहाघाट नगर में 16.20 लाख मांग के सापेक्ष पेयजल योजनाओं से महज 4.50 लाख लीटर (27 प्रतिशत) पानी की आपूर्ति हो रही है। इसके चलते लोगों को तीसरे या चौथे दिन पानी मिल रहा है। और ज्यादातर लोग हैंडपंप, गधेरों की दौड़ लगाने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं जल संस्थान द्वारा पिकअप और टैंकरों के जरिए पेयजल वितरण का कार्य शुरू नहीं करने से लोगों में नाराजगी है।
लोहावती नदी और जल स्रोतों में कमी के चलते चौड़ी लिफ्ट पेयजल योजना, बनस्वाड़,ऋषेश्वर ट्यूबवेल, फोर्ती गधेरे के जल स्तर में काफी कमी आ गई है। जल संस्थान के अभियंता पवन बिष्ट का कहना है कि पेयजल से लोगों को निजात दिलाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पिकअप और नगर क्षेत्र के मुख्य टैंक में टैंकरों से आवश्यकतानुसार पानी डाला जाएगा।
बूंद-बूंद टपक रहा पानी
चंपावत। जिला मुख्यालय में पेयजल संकट लगातार बढ़ रहा है। यहां एक दिन छोड़ पेयजल की आपूर्ति की जा रही है, मगर यह पानी इतना कम है कि दस लीटर की बाल्टी को भरने में भी 5 मिनट से अधिक का समय लग रहा है। कनलगांव, मल्लीहाट, तल्लीहाट, जूप, गोरलचौड़ क्षेत्र आदि में लोग एक-एक बाल्टी पानी के लिए भटकने को मजबूर हो रहे हैं। नागरिकों ने पेयजल आपूर्ति को सुधारने और हालात सामान्य होने तक वैकल्पिक उपाय करने की मांग की है। इधर जल संस्थान के कनिष्ठ अभियंता किशोर पंत का कहना है कि जल स्रोतों में भारी गिरावट की वजह से पेयजल डिस्चार्ज में कमी आई है। इस वजह से संकट बढ़ा है। जरूरत पड़ने पर टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जाएगी।