सिंगदा पेयजल योजना में पिछले एक पखवाड़े से जलापूर्ति बंद होने से गांव के लोगों के समक्ष पानी की समस्या गहरा गई है। दरअसल यहां की धार गाढ़ पेयजल योजना 1960 में बनाई गई थी। 20 वर्ष बाद इस पेयजल योजना को ग्राम पंचायत को रखरखाव के लिए सौंपा गया। आठ किमी लंबी तीन इंच मोटे पाइप वाली इस पेयजल योजना का रखरखाव करना ग्राम पंचायत के बूते का नहीं है। ग्राम प्रधान चंद्रा देवी, बीडीसी सदस्य मनोज सामंत का कहना है कि ग्रामीणों के पास न तो इतने संसाधन हैं कि वे योजना की मरम्मत कर सकें और न ही गांव में ऐसे तकनीकी जानकार लोग हैं जो छोटी-मोटी टूट-फूट को ठीक कर सकें।
इस संबंध में उन्होंने सीडीओ एवं जल संस्थान के अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया है। सीडीओ एसएस पांगती ने लोगों की दिक्कतों को देखते हुए इस योजना को जिला योजना में शामिल करने एवं तल्ला बापरू पेयजल योजना का पुनर्गठन करने का आदेश दिया। उधर, सलना-बाराकोट-फरतोला पेयजल योजना के निर्माण में धन न मिलने के कारण यह योजना खटाई में पड़ी हुई है। 14 किमी लंबी इस योजना में बीआरजीएफ से 40 लाख रुपये मिले थे, जिसमें बाराकोट बाजार सहित फरतोला, गुरना, संतोडा, काकड़, पम्दा गांवों को जलापूर्ति की जानी थी।
अब बीआरजीएफ योजना समाप्त होने से योजना मंझधार में पड़ गई है। ग्राम प्रधान भगवानदास जोशी, सुनील वर्मा ने इस संबंध में डीएम से तत्काल हस्तक्षेप कर योजना को चालू कराने की मांग की है।