वेस्ट डिस्पोजल मैनेजमेंट में ट्रंचिंग ग्राउंड की कमी
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खूबसूरत शहरों की अवधारणा क्लीन सिटी-ग्रीन सिटी के बगैर मुमकिन नहीं है पर जिले के चारों नगर निकायों में गंदगी से निपटने के बुनियादी इंतजाम तक नहीं है। जैविक और अजैविक कूड़े के निस्तारण का कोई सिस्टम नहीं है। कहीं भी ट्रंचिंग ग्राउंड नहीं है। अब कूड़े निस्तारण का मामला हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंचने से इन खामियों के जल्द दूर होने की उम्मीद बंधी है।
जिले में चंपावत और टनकपुर नगर पालिकाएं और लोहाघाट और बनबसा में नगर पंचायतें हैं, लेकिन इनमें से किसी भी जगह कूड़ा फेंकने का कोई सिस्टम नहीं है। जिले में 70 क्विंटल कूड़ा सड़क किनारे फेंका जा रहा है। मुख्यालय का कूड़ा खेतीखान रोड के पास फेंका जा रहा है। ऐसे ही हाल दूसरी नगर निकायों के हैं। कूड़ा निस्तारण का कायदे का प्रबंध नहीं होने से शहर में गंदगी बढ़ रही है।
वहीं पंचायत से पालिका बनने के बावजूद कूड़ा निस्तारण योजना अधर में लटकी है। रोड पर कूड़े को फेंकने पर राज्य मानवाधिकार आयोग की न केवल फटकार लग चुकी है, बल्कि जनवरी में नगर पालिका को आयोग के सामने देहरादून में तलब भी होना पड़ा था। वहीं चंपावत में ट्रंचिंग ग्राउंड को लेकर 2014 से शुरू प्रक्रिया बेहद धीमी है। पालिका का कहना है कि ट्रंचिंग ग्राउंड के बाद ही सफाई व्यवस्था पटरी पर आ सकेगी। जैविक और अजैविक कूड़े को भी अलग किया जा सकेगा और तभी वेस्ट डिस्पोजल मैनेजमेंट रूल्स 1999 का क्रियान्वयन हो सकेगा।
लटकी है वन अनापत्ति
चंपावत में ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए शहर से करीब दस किलोमीटर दूर बनलेख और धौन के बीच जगह का चयन दो साल पहले किया जा चुका है। लेकिन इसके आगे की प्रक्रिया लटकी है। अधिशासी अधिकारी अभिनव कुमार का कहना है कि .9 हेक्टेयर जमीन के चयन के बाद ग्राम पंचायत ने आपत्ति लगा दी थी। जिसे दूर करने में काफी वक्त लगा। अब इस बाधा को पार करने के बाद पत्रावली वन विभाग को भेजी गई है। यहां से अनापत्ति मिलने के बाद ट्रंचिंग ग्राउंड की डीपीआर बनाई जाएगी। उनका कहना है कि अदालत के हस्तक्षेप के बाद अड़चनों को दूर करने में मदद मिलेगी।
शिफ्ट होगी कांपेक्टर मशीन
चंपावत में पॉलिथीन-प्लास्टिक की रिसाइक्लिंग के लिए जुलाई 2014 में लगाई गई कांपेक्टर मशीन फिलहाल धन की बर्बादी का नमूना है। 8 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी इसका उपयोग नहीं हुआ, जबकि पालिका का दावा इस मशीन से आमदनी होने का भी था। जिला मुख्यालय में कूड़े के रूप में महीने में करीब पांच क्विंटल पॉलीथिन एकत्र होती है। मशीन में एक बार में 40 टन पॉलीथिन को रिसाइकिल कर 4 टन पॉलिथीन में तब्दील करने की क्षमता है। इससे किसानों को जैविक खाद भी मिलनी थी। इस पॉलिथीन को काठगोदाम में बनाए गए प्लांट में बिक्री के लिए भेजा जाना था। पर ये सब भी हवा-हवाई रहा। ईओ अभिनव कुमार का कहना है कि ट्रंचिंग ग्राउंड बनने के बाद कांपेक्टर को भी उसके नजदीक शिफ्ट किया जाएगा।