राज्य के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे पर्यटक स्थल मौजूद हैं, जो कि अपनी नैसर्गिक छटा और सांस्कृतिक विरासत का बखान स्वयं करते प्रतीत होते हैं, लेकिन इन स्थानों पर पर्यटकों के उचित आवास और खान-पान की सुविधा न होने के कारण यह स्थल पर्यटन मानचित्र में जगह नहीं बना रहे हैं, जिस कारण अब तक अनछुए रहे पर्यटन स्थलों के विकास के लिए राज्य सरकार की ओर से अतिथि उत्तराखंड गृह आवास नियमावली तैयार की जा रही है।
नियमावली के लागू होने के बाद पर्यटकों को दूरस्थ गांवों में होम स्टे कराया जाएगा, जिसके तहत राज्य के शहरी क्षेत्रों के साथ ही दूरस्थ इलाकों में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए स्तरीय आवासीय सुविधाएं बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर रोजगार के उपलब्ध कराने के साथ ही भवन स्वामियों को अतिरिक्त आय का जरिया उपलब्ध कराया जाएगा।
जिला पर्यटन विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह ऐरी के अनुसार होम स्टे योजना का उद्देश्य विदेशी एवं घरेलू पर्यटकों के लिए साफ और किफायती आवासीय सुविधाएं प्रदान करना है। इससे विदेशी पर्यटकों को भी एक भारतीय परिवार के साथ रहने, उनकी संस्कृति का अनुभव एवं परंपराओं को समझने के साथ ही उत्तराखंडी व्यंजनों के स्वाद लेने का अवसर मिलेगा।
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद करेगा संचालन
होम स्टे योजना का संचालन उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की ओर से किया जाएगा। जिला पर्यटन विकास अधिकारी के अनुसार योजना की नियमावली अन्य प्रकार की आवासीय सुविधाओं जैसे रिसॉर्ट, होटल, मोटल, गेस्ट हाउस, लॉज पर लागू नहीं होगी।
सिल्वर और गोल्ड श्रेणियों में होगा भवनों का चयन
योजना के लिए गांवों में भवनों का चयन दो श्रेणियों सिल्वर और गोल्ड में किया जाएगा। ऐसे भवनों के पंजीकरण को प्रमुखता दी जाएगी जो अपनी साज-सज्जा, व्यंजन प्रस्तुतीकरण में भारतीय और उत्तराखंड की परंपराओं को मौलिक रूप से शामिल करेंगे। इसके अलावा स्थानीय वास्तुकला शैली से बने भवनों को प्राथमिकता दी जाएगी।
होटल की तरह नहीं लगेगा रिशेप्सन काउंटर
योजना के तहत चयनित आवासों में भवन स्वामी होटल की तरह स्वागत पटल (रिशेप्सन काउंटर) नहीं लगाएगा तथा घर सामान्य आवास की भांति ही रखेगा। विदेशी पर्यटकों के होम स्टे की सूचना भवन स्वामी की ओर से स्थानीय थाने को उपलब्ध करानी होगी।
इन गांवों का किया गया है चयन
जिले में अतिथि होम स्टे के लिए फोर्ती, जौल, सूखीढांग, श्यामलाताल, पंचेश्वर, पवेत, देवीधुरा, रीठासाहिब, मंगोली, डुंगरासेठी, किमतोली, कलीगांव, चाख, छंदा, रेगडू, खकोड़ा, मरोड़ाखान, बापरू, बसकुनी, नेवलटुकरा, धौनीशिलिंग, जाख, जिंडी, सिरकोट, चमदेवल, राकडी फुलारा, दुधपोखरा, मुडियानी आदि गांवों का चयन किया गया है।