चंपावत। चंपावत जिले की अमोड़ी ग्राम पंचायत के भुम्टा तोक के ग्रामीण गांव की पुरानी क्षतिग्रस्त पनचक्की (घराट) का पुनर्निर्माण कर पनचक्की का सामूहिक उपयोग करेंगे। इस संबंध में ग्रामीणों की ओर से पांच दशक पुराने घराट की मरम्मत के लिए प्रशासन से भी सहयोग मांगने का निर्णय लिया है।
घराट का पुनर्निर्माण होने से क्षेत्र के तीस से अधिक परिवारों को अनाज पीसने की सुविधा का लाभ मिलने लगेगा। कोरोना महामारी के कारण लागू लॉकडाउन में अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में आटा चक्कियों का संचालन बंद होने के कारण ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अमोड़ी के ग्रामीणों ने भुम्टा तोक में करीब पांच दशक पूर्व से बंद चल रहे पनचक्की के पुनर्निर्माण का निर्णय लेकर लोगों को राहत पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश भट्ट के अनुसार पनचक्की को फिर से चालू किए जाने के लिए उरेडा विभाग के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों ओर जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग मांगा जाएगा।
कोरोना काल में श्रमदान करेंगे क्षेत्र के ग्रामीण युवक
चंपावत। गांव की सामाजिक विरासत को बचाने के लिए क्षेत्र के ग्रामीण युवक श्रमदान का सहारा लेंगे। ग्रामीण युवा संजय जोशी, हेम जोशी, ललित जोशी, मुकेश जोशी, कमल जोशी आदि ने बताया कि कोरोना काल में अधिकांश लोगों के घरों में ही रहने से अब पनचक्की के पुनर्निर्माण के लिए श्रमदान करने का निर्णय लिया गया है।(संवाद)
पौष्टिक माना जाता है घराट में पिसा अनाज
चंपावत। जिले में वर्तमान में दस से ज्यादा स्थानों में घराटों का संचालन किया जा रहा है। जिनका संरक्षण उरेडा विभाग की ओर से किया जा रहा है। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित घराटों में पिसे अनाज को सामान्य चक्की में पिसे अनाज की तुलना में ज्यादा पौष्टिक माना जाता है।(संवाद)