लोहाघाट (चंपावत)। युवा साहित्य चेतना मंच खटीमा की ओर से एक शाम मातृ शक्ति के नाम कार्यक्रम में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों के कवियों का ऑनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया।
इस दौरान कवियित्रियों ने एक से बढ़कर एक कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि खंड शिक्षाधिकारी खटीमा सोनी मेहरा रहीं। लोहाघाट की रिटायर एबीडीओ हेमा जोशी की अध्यक्षता और पुष्पा जोशी के संचालन में हुए कार्यक्रम का शुभारंभ विपिन जोशी, दीपा जोशी ने गणेश वंदना के साथ किया। चंपावत की मीनू जोशी जी ने ‘ये चिराग जल रहे हैं अभी यारो, रेजा-रेजा में रोशनी जो अभी बाकी है’, हेमा जोशी ने ‘आज संभल जा अरे तू मानव, अहंकार दिखलाता क्यों है’, लोहाघाट पीजी कॉलेज की डॉ. सुमन पांडेय ने ‘ए मानव तू समझ न पाया, बाढ़-बारिश तूफान ने तुझे बार-बार हर बार चेताया’, बागेश्वर की डा. पिंकी पांडे ने ‘विकल नर-नारी, बच्चे परेशान, कैसी ये महामारी सब जग हलकान’ और खटीमा की राधा तिवारी ने कहा, ‘दूरी ही इस रोग का होता यहां निदान, हाथ जोड़ कर कीजिए सबका ही सम्मान’, अल्मोड़ा की सोनू उप्रेती ने ‘ओ आमा ओ बुबु लगाओ धिं एक दडेंक उठाओ नै एक लट्ठ करो तौ कोरोनियक खड़पट्ट’, हल्द्वानी की मंजू पांडेय ने ‘एक अध्याय जीत का लिख गईं बेटियां’, सितारगंज की पुष्पा जोशी ने ‘अरे युवाओं सुनो देश के आओ, सर संधान करें’ कविता का पाठ किया।
विपिन चंद्र जोशी ने ‘दीया हूं दीया, जलना चाहता हूं’, चंपावत की दीपा पांडेय ने ‘विषाक्त विषाणु सर्वत्र विकीर्णा’, पिथौरागढ़ की डॉ.गीता पंत ने ‘विवश मानवता पूछ रही, आया यह कौन है’ रचनाएं प्रस्तुत की। मंच की ओर से सभी प्रतिभागियों को ऑनलाइन प्रमाण पत्र देकर सम्मानित करते हुए भविष्य में इस प्रकार के कार्यक्रम जारी रखने की बात कही गई।