चंपावत-टनकपुर एनएच पिछले कुछ दिनों से जगह-जगह बंद होने के कारण तराई से सब्जियां पहाड़ पहुंचने में तीन दिन लग रहे हैं। इस कारण सब्जी व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सब्जी विक्रेता कैलाश सिंह ने बताया कि एनएच बंद होने के कारण पहाड़ पर सब्जियां हल्द्वानी-देवीधुरा मार्ग से होते हुए लाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में सुबह सब्जियां लेकर चला वाहन शाम तक पहुंच जाता है लेकिन इन दिनों सड़क बंद होने से वाहन को यहां पहुंचने में तीन दिन तक लग जा रहे हैं। ऐसे में कई सब्जियां खराब हो जा रही हैं।
इस कारण उन्हें हर रोज हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है। व्यापारियों ने बताया कि मार्ग बंद होने के कारण सब्जियों के दाम में भी 20 से 30 रुपये तक बढ़ोतरी हुई है। टमाटर 60 से 80 रुपये किलो, भिंडी 30 से 50 रुपये, लौकी 25 से 45, करेला 40 से 60 प्रति रुपये किलो तक पहुंच गई है।
स्वाला डेंजर जोन रास्ते में फंसे वाहन चालकों के लिए बना मुसीबत
चंपावत से टनकपुर जाने वाले वाहन चालक खाली ट्रक लेकर रास्तें में फंसे हुए हैं। वहीं जरूरी सामग्री लेकर चंपावत और पिथौरागढ़ जाने वाले ट्रक चालक टनकपुर में फंसे हुए हैं। उनके लिए मोबाइल भी चार्ज करना आसान नहीं हो रहा है। ट्रक की निगरानी करना भी जरूरी है। स्वाला में लगातार मलबा आने के कारण मंगलवार से एक पोकलेन मशीन भी मलबे में दबी हुई है। इससे डेंजर जोन में काम करना भी मुश्किल हो रहा है। सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतारें लगी हुई हैं। वाहन मालिकों का कहाना है कि सड़क बंद होने से वाहन सात दिनों से रास्ते में फंसे हुए हैं। इससे वाहनों की किस्त निकालना भी मुश्किल हो गया है।
स्वाला में एनएच बंद होने से सिलिंडर के पांच वाहन फंसे हुए हैं। एक वाहन में 234 सिलिंडर आते है। अभी मुख्यालय में उपभोक्ताओं के सिलिंडर वितरित किए जा रहे है। गोदाम में 200 से अधिक सिलिंडर बचे हुए हैं। इसमें से 100 सिलिंडरों को बांटा जाएगा। अन्य सिलिंडरों को आपदा को देखते हुए गोदाम के स्टाक में रखा जाएगा। - प्रकाश मुरारी, गैस एजेंसी, प्रभारी चंपावत
स्वाला में एनएच बंद होने से छह दिनों से बनलेख में फंसे हुए हैं। अब तो खाने-पीने की समस्या भी होने लगी है। आसपास के होटलों में खाने की व्यवस्था नहीं हैं। आसपास की दुकानों में सामान भी नहीं बचा है। -नौशाद अहमद, वाहन चालक
एनएच बंद होने से छह दिनों से बीच रास्ते में फंसे हुए हैं। हरिद्वार से पिथौरागढ़ सामान ले गए थे लेकिन अब एनएच बंद होने से परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। खाने से लिए चंपावत जाना पड़ रहा है। - रहीश कुमार, वाहन चालक
बुडम कठौल क्षेत्र में सरड़ा नदी कर रही भूकटाव
टनकपुर क्षेत्र में हुई तेज बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पूर्णागिरि तहसील के दूरस्थ कठौल बुडम क्षेत्र में बारिश में उफनाई सरड़ा नदी से भूकटाव हुआ है। नदी से कठौल बुडम के रतखाल में मकान को खतरा उत्पन्न हो गया है और कई पेड़ नदी की भेंट चढ़ गए हैं। ग्रामीण मोहन चंद्र गड़कोटी ने बताया कि नदी से हो रहे कटाव के कारण उनके मकान को भी खतरा उत्पन्न हो गया है।
इधर, चंपावत के अमोड़ी ग्राम पंचायत के इजरा तोक में दोमंजिला एक आवासीय मकान खतरे की जद में आ गया है। परिजनों ने पड़ोसी के घर में शरण ली है। पीड़ित रमेश चंद्र भट्ट ने बताया कि सड़क कटिंग होने के दौरान उनके मकान के आगे से लगातार भूस्खलन होने से अब मकान पूरी तरह खतरे की जद में आ गया है। उन्होंने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द सुरक्षा की मांग की है। साथ ही उनके परिवार को अन्यत्र शिफ्ट कराने और उचित मुआवजा देने की भी मांग की है।
आपदा से नुकसान का आकलन कर राहत राशि बांटें : डीएम
चंपावत डीएम मनीष कुमार की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को विकास भवन सभागार में आपदा प्रबंधन से संबंधित बैठक हुई। डीएम ने आपदा से क्षतिग्रस्त मकान, कृषि भूमि, फसल, पशुधन, सड़क और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों की क्षति का आकलन और सूचीकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारियों को ग्राम स्तर पर आपदा प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए ताकि प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द राहत राशि दी जा सके। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में सीडीओ डॉ. जीएस खाती, एडीएम जयवर्धन शर्मा, डीडीएमओ देवेंद्र पटवाल आदि मौजूद रहे।