चंपावत विकासखंड की वैला ग्राम पंचायत अंधकार युग की गवाह बन गई है। यहां की हर रात अमावस की रात है। ये नौबत तब है, जब यहां बिजली की लाइन बिछी होने से लेकर ट्रांसफार्मर तक है। अब यह सब इस लायक नहीं है कि इसका उपयोग किया जा सके। गांव के लोगों की रात रोशन करने के लिए केरोसिन से जलने वाली डिबरी अकेला सहारा है।
वैला गांव सिस्टम की नाकामी की एक झलक है। 2006 में राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन से गांव को बिजली से जोड़ने की शुरुआत की गई और कागजों में गांव को विद्युतीकृत दर्शा भी दिखा दिया। ग्राम प्रधान केशव दत्त मौनी कहते हैं कि 2008 में गांव के 19 लोगों ने बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन भी किया, लेकिन न कनेक्शन मिला और नहीं गांव में बिजली के इन तारों से उजाला हुआ।
गांव अब भी अंधेरे में है। यहां रहने वाले 487 लोग डिबरी के उजाले से रात के अंधेरों को दूर करने की जद्दोजहद कर रहे हैं। बिजली न होने से टीवी की दुनिया भी इनके लिए अनजानी है। रेडियो विश्व की घटनाओं को जानने का अकेला जरिया है। लाइट न होने की मार अक्सर यहां मोबाइल सेवा पर भी पड़ रही है।
तीन स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रही मार
वैला ग्राम पंचायत में तीन स्कूल हैं। दो प्राथमिक स्कूल और एक प्राइवेट जूनियर हाईस्कूल। इन तीनों स्कूलों में कुल मिलाकर 105 बच्चे हैं। बिजली नहीं होने से घर में रात में पढ़ना कठिन हो रहा है, वहीं स्कूल में कंप्यूटर के ज्ञान से भी वे वंचित हो रहे हैं।
अब सोलर लाइट भी काम की नहीं
बिजली विहीन गांव की श्रेणी में होने पर इस गांव में करीब 15 साल पहले 40 सोलर लाइटें मिली थी, लेकिन अब ये लाइटें भी खराब हो चुकी है। इसका लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। अलबत्ता इक्का-दुक्का सोलर प्लेटों से जरूर कुछ ग्रामीण मोबाइल चार्ज करते हैं।
बीडीसी बैठक में उठाएंगे मुद्दा
पिछले साल वैला के ग्राम प्रधान बने केडी मौनी इस मसले को तीन बार उठा चुके हैं। बिजली विभाग ही नहीं डीएम से लेकर सीएम के दरबार तक मामले को उठाने के बाद गांव का अंधेरा नहीं छंट सका है। मौनी अब चंपावत क्षेत्र पंचायत समिति की बैठक में फिर से इस आवाज को बुलंद करेंगे।
कुछ समय पूर्व पाटी के जूनियर इंजीनियर बीबी गहतोड़ी को मौका मुआयना के लिए भेजा गया था। उनकी रिपोर्ट के आधार पर दीनदयाल जीवन ज्योति योजना के तहत मरम्मत का इस्टीमेट भेजा गया है। वैला में लगे बिजली के तार और ट्रांसफार्मर खराब हो गए हैं। इन्हें बदलकर यहां की बिजली व्यवस्था जल्द सुचारु की जाएगी। -चंदन सिंह बसनेत, ईई, यूपीसीएल, चंपावत।