निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग में खतरे की जद में आ रहे पेड़।
- फोटो : निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग में खतरे की जद में आ रहे पेड़।
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन बारहमासी सड़क पर तिलौन से लेकर खूनाबोरा तक खतरे वाले 39 से अधिक पेड़ हैं। इन स्थानों पर सड़क किनारे खड़े ये पेड़ कभी भी गिरने के कगार पर हैं लेकिन अभी इन्हें काटने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है।
150 किलोमीटर के इस निर्माणाधीन मार्ग पर तिलौन से खूनाबोरा के बीच पांच किलोमीटर के हिस्से में 39 पेड़ लोगों के लिए खतरा बने हैं। इन खतरे वाले पेड़ों को हटाने के लिए अभी कोई कदम नहीं उठाया गया है। 24 फरवरी को तिलौन में एक पेड़ के कार पर गिरने से दो महिलाओं की मौत हो चुकी है।
बुधवार को भी इसी स्थान पर दो पेड़ जमींदोज हुए, जिन्हें हटाने में पुलिस की टीम को आधा घंटा लग गया। ग्रामीण नवीन राम, सुरेश, रमेश जोशी आदि का कहना है कि वे काम के सिलसिले में हर रोज इस रूट पर आवाजाही करते हैं लेकिन उन्हें सड़क के बजाय लटके हुए पेड़ों को देखते हुए आगे बढ़ने को मजबूर होना पड़ता है।
उन्होंने जल्द से जल्द इन पेड़ों को काटकर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का प्रशासन से आग्रह किया है। प्रभागीय वनाधिकारी कुबेर सिंह बिष्ट ने बताया कि 24 फरवरी के हादसे के बाद प्रशासन के निर्देश पर पेड़ों की गिनती का काम चल रहा है। जल्द ही खतरे वाले पेड़ों को चिन्हित कर काटने का काम शुरू कर दिया जाएगा। साथ ही काली कुमाऊं वन क्षेत्र में चिन्हित 81 पेड़ों को काटे जाने पर एनजीटी की ओर से लगाई गई रोक को हटाने के लिए फिर से अपील की जाएगी।