फुटबॉल के जुनून वाले चंपावत में इन दिनों ऑल इंडिया काली कुमाऊं जैसी नामी फुटबॉल प्रतियोगिता हो रही है। प्रतियोगिता में कई दिग्गज टीमें शिरकत कर रही हैं लेकिन चंपावत में फुटबॉल प्रतिभाओं को निखारने के लिए न खेल मैदान है और न ही खेल प्रशिक्षक।
खेल निदेशालय ने पिछले साल मैदान और आधारभूत ढांचा नहीं होने पर खेल कैंप बंद करने के आदेश दिए थे। इसका नतीजा यह है कि बीते डेढ़ साल से फुटबॉल प्रशिक्षण ठप होने से खेल प्रतिभाओं के लिए चंपावत के दरवाजे बंद हो गए हैं।
चंपावत और लोहाघाट में मार्च 2018 तक फुटबॉल, हॉकी, क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन, वॉलीबाल और एथलेटिक्स के प्रशिक्षण के लिए कैंप लगते थे। साल भर में दस माह तक लगने वाले इन कैंपों से खासकर नौनिहालों को खेलों में हुनरमंद बनने का मौका मिलता था लेकिन पिछले साल अप्रैल से ये प्रशिक्षण बंद हो गए हैं।
इस वक्त चंपावत में वॉलीबाल और लोहाघाट में कराटे को छोड़ हर खेल के प्रशिक्षण पर ब्रेक लग गया है। इस वजह से 1100 से अधिक नन्हें खिलाड़ी खेल की बारीकियों को सीखने से वंचित हो रहे हैं। वहीं इन खेलों के नहीं होने का नुकसान 24 खेल प्रशिक्षकों को भी हो रहा है। ये सभी प्रशिक्षक अब बेरोजगार हो गए हैं।
टनकपुर में चल रहे हैं सात कैंप
चंपावत। खेल विभाग की ओर से इस वक्त टनकपुर स्टेडियम में ही खेलों के ठीकठाक तरीके से प्रशिक्षण चल रहे हैं। जिला खेल अधिकारी आरएस धामी ने बताया कि टनकपुर में हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट, मुक्केबाजी, वॉलीबाल, ताइक्वांडो और बास्केटबॉल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
चंपावत की खेल गतिविधियां करीब डेढ़ साल पूर्व तक शिक्षा विभाग के गोरलचौड़ मैदान में होती थीं। खेल विभाग का अपना मैदान और आधारभूत ढांचा नहीं होने से विभागीय आदेशों के क्रम में चंपावत में होने वाले कैंप बंद कर दिए गए हैं। आरएस धामी, जिला क्रीड़ाधिकारी, चंपावत।