पर्यटक प्रदेश का सपना कुदरती खूबसूरती वाले एबटमाउंट में आते-आते हांफता नजर आ रहा है। 1700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित लोहाघाट विकासखंड का एबटमाउंट सैलानियों के लिए कुदरती सौंदर्य के विहंगम नजारे पेश करता है। आजादी से पूर्व का चर्च भी यहां है। मगर एबटमाउंट की निर्माणाधीन पर्यटन परियोजना का काम बजट न मिलने से 42 महीनों से अधर में लटका है। अधूरे काम से यहां पर्यटकों की आमद थम गई है। वहीं निर्मित कार्यों की देखरेख के लिए भी कार्यदायी संस्था को हर माह धन खर्च करना पड़ रहा है।
लोहाघाट शहर से सात किमी दूर एबटमाउंट सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। मगर यहां निर्माणाधीन इको हट के काम के जून 2014 से बंद होने से पर्यटन पर विराम लग रहा है। न केवल गर्मियों में बल्कि अक्तूबर से दिसंबर तक खुशगवार मौसम के चलते सैलानियों के लिए यह पसंदीदा स्थान था। इस दौरान हिमालय बेहद करीब नजर आता है। मगर पर्यटन परियोजना का काम पूरा न होने से सैलानी इसका लुत्फ नहीं उठा पा रहे हैं।
केंद्र की पर्यटन परियोजना में एबटमाउंट में 4.62 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। कार्यदायी संस्था सीएनडीएस के परियोजना प्रबंधक संजीव वर्मा का कहना है कि योजना के अंतर्गत यहां आठ इको हट, बहुउद्देश्यीय भवन, व्यू प्वाइंट, चहारदीवारी, एबटमाउंट तक मार्ग निर्माण होना था। आठ इको हट समेत 16 लोगों के एक साथ ठहरने वाला एक बहुउद्देश्यीय भवन तो दिसंबर 2014 में ही बन चुका है। मगर इसके बाद से दो व्यू प्वाइंट नहीं बन सके हैं। पानी की व्यवस्था भी नहीं है। विभाग को निर्माण के लिए स्वीकृत 4.62 करोड़ में से 3.57 करोड़ रुपये ही मिल सके हैं। बकाया 1.05 करोड़ की राशि न मिलने से कार्य रुका है।
पर्यावरण के अनुकूल हैं हट
इस इलाके की खूबसूरती के मद्देनजर यहां पर्यावरण के अनुकूल इको लॉग हट बनाए गए हैं। इन इको हटों का निर्माण यूरोप से मंगाई गई खास लकड़ी से किया गया है। इन हटों को रसायनों में शोधित कर हल्का, काफी टिकाऊ बनाया गया है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद एबटमाउंट कुमाऊं के नए पर्यटन केंद्र के रूप में सामने आएगा।
प्रभावित हो रहा है स्थानीय रोजगार
एबटमाउंट क्षेत्र के बीडीसी सदस्य सलमान जावेद का कहना है कि एबटमाउंट पर्यटन परियोजना का काम कई सालों से लटका है। अधूरे काम की वजह से पर्यटक नहीं आ रहे हैं। सरकार को तुरंत धन आवंटित कर बचे काम को तत्काल पूरा कराना चाहिए। सैलानियों के न आने से यहां के लोगों का रोजगार भी प्रभावित हो रहा है। जो इक्का-दुक्का सैलानी आते भी हैं, वे आसपास बने निजी हटों में ठहरते हैं।
कोट
एबटमाउंट के इको हट का काम धन की कमी से लंबे समय से लटका है। धन आवंटन करने की मांग को लेकर पत्राचार किया है। इस साल जून में टनकपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री ने भी बजट का ऐलान किया था, मगर 1.05 करोड़ रुपये की राशि नहीं मिली है। ठेकेदारों द्वारा कराए जा चुके 40 लाख रुपये का भुगतान भी बाकी है।
- संजीव वर्मा, परियोजना प्रबंधक, सीएनडीएस, लोहाघाट।
कोट
एबटमाउंट की पर्यटन परियोजना के पूरा न होने का असर सैलानियों की संख्या पर पड़ रहा है। काम पूरा न होने से पर्यटन विभाग इसका अधिग्रहण भी नहीं कर पा रहा है। डीएम के माध्यम से बकाया रकम के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
- लता बिष्ट, जिला पर्यटन अधिकारी, चंपावत।