चंपावत। अतिथि देवो भव:, ये उक्ति भारत की पुरातन संस्कृति का अभिन्न अंग है। मगर इस जिले में अतिथियों के स्वागत के लिए अतिथि गृहों के हाल भी ठीक नहीं है। पर्यटकों के लिए जिले में सबसे बड़ा सहारा पर्यटक आवास गृह (टीआरएच) है।
लेकिन ये टीआरएच ऐसे, जिनमें पेयजल, बिजली तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। बत्ती गुल होने पर पर्यटकों को मोमबत्ती का सहारा लेना पड़ता है। पेयजल की कमी से कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) की आय घटने के साथ ही खर्च भी बढ़ रहा है।
मैदान में गर्मी बढ़ते ही टूरिस्ट सीजन बढ़ता है। अप्रैल से पहाड़ में पर्यटक सीजन शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार ये सीजन बेहद ढीला है। जिला मुख्यालय के टीआरएच में पानी का जबर्दस्त संकट है। फरवरी से शुरू पेयजल किल्लत अब गंभीर संकट में तब्दील हो चुका है। इस वक्त दो दिन में एक बार पानी मिल रहा है, वह भी बमुश्किल आधा घंटा। टीआरएच में तीन हजार लीटर पानी के लिए निगम 1500 रुपये खर्च कर रहा है।
पर्यटन सीजन में टीआरएच में रोजाना औसतन 20 हजार लीटर पानी की जरूरत होती है। पानी की कमी से इस बार पर्यटकों की आमद भी घटी है। जनरेटर नहीं लगा है। कोई वैकल्पिक प्रबंध भी नहीं हैं। जिस कारण रात में बिजली गुल होने पर पर्यटकों को मोमबत्ती का सहारा लेना पड़ रहा है। पर्यटक आवास गृह को बेहतर भी नहीं किया जा सका है।
चंपावत टीआरएच में इस साल अप्रैल में सिर्फ 15 टूरिस्ट ही आए। जिनसे 30 हजार रुपये की आय हुई। ये संख्या पिछले साल से आधी से भी कम है। अप्रैल 2015 में 36 यात्री टीआरएच में रुके थे। इनसे टीआरएच को 70 हजार रुपये की आय हुई। इसमें दो बारातों की बुकिंग भी शामिल हैं। इस साल की आय में से छह हजार रुपये पानी पर ही खर्च हो चुके हैं।
चंपावत पर्यटक आवास गृह के दिन फिरने की उम्मीद जगने लगी है। अब इस इमारत को पूरी तरह नया स्वरूप दिया जाएगा। प्रबंधक आशावर फैज का कहना है कि छह माह पहले विभागीय जूनियर इंजीनियर ने टीआरएच का मुआयना किया था। की मौजूदा इमारत को ध्वस्त कर नया भवन बनाया जाएगा। आधुनिक सुविधा मिलने के बाद टीआरएच निजी क्षेत्र के होटल और बारातघरों से मुकाबला कर सकेगा।