नेपाल सीमा से लगे चमदेवल क्षेत्र के जिंडी और सुंई गांव में गौरा महोत्सव की धूम मची है। महिलाओं और पुरुषों ने झोड़ों का गायन किया। जिंडी में महोत्सव के तीसरे दिन मुख्य अतिथि ग्राम प्रधान संगठन के ब्लाक अध्यक्ष चांद सिंह बोहरा ने कहा कि गौरा के जरिए पूर्वजों की इस विरासत को संजोया जा रहा है।
ग्राम प्रधान मदन कलौनी की अध्यक्षता और कल्याण चंद के संचालन में हुए महोत्सव में सुबह पूजा-अर्चना के बाद शाम को गौरा, धुमारी, चाली का गायन और नृत्य किया। श्रद्धालुओं ने रामायण, श्रीकृष्ण और महाभारत से संबंधित गीतों का गायन किया। उन्होंने रामायण में धनुष यज्ञ तक गाये जाने में तोड़ी हालों शिव को धनुष, रामचंद्र स्वामी है गया तैयार, सीता का हाथ में जयमाला होली, तनुले रामचंद्र पैराछ.... आदि का गायन किया। महिलाओं ने गौरा देवी की प्रतिमा के चारों ओर मांगलिक गीत गाए। उन्होंने झोड़े, चांचरी आदि की भी प्रस्तुति दी। महोत्सव में चंदी चंद, प्रताप चंद, लक्ष्मण चंद, गुमान सिंह प्रथोली, देवी चंद, अमर चंद, ललित चंद, प्रेम चंद, हयात राम, दीवानी राम, केदार चंद आदि मौजूद थे।
इधर सुंई चौबे गांव, खैसकांडे व पुजारी गांव में भी गौरा महोत्सव की धूम शुरू हो गई है। महिलाओं द्वारा धुरा रायन्ज, धुरा बांज भैसी को मयालो दौ, कपोली बींदीया ना थी, ना जानू पयाला दौ, कपोली बींदीया दयूंन, जा चेली पयालो दौ आदि गीतों का गायन किया गया। रेवती देवी, गोविंदी देवी, निर्मला चौबे, सुशीला चौबे, माधवी, कमला, हेमा, मंजू, अंजलि, नीमा, दीपा आदि गौरा-महेश की प्रतिमा बनाकर पूजन किया।