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सात दिन से छका रहा बाघ, दहशत के साये में लोग

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ढकना बडोला और अन्य संभावित ठिकानों पर बाघ को ट्रेस करने के लिए गश्त करती वन विभाग की टीम। संवाद न्? - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। ढकना बडोला क्षेत्र की एक महिला को मारने वाले बाघ को ट्रेप करने में वन विभाग के तमाम प्रयास अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं। पिंजरे में फंसना तो दूर, बाघ पिंजरे के आसपास भी नहीं फटक रहा है। बाघ की लोकेशन ट्रेस नहीं होने से चंपावत के आसपास के गांवों के लोग दहशत में हैं। ढकना क्षेत्र की महिलाएं जंगल जाने का साहस नहीं जुटा पा रही हैं। मवेशियों को आसपास की घास और दूसरे प्रकार क पशु आहार दिया जा रहा है।
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पिंजरा लगाने के अलावा बाघ का पता लगाने के लिए वन विभाग 11 किमी के दायरे में नौ जगहों पर सीसीटीवी और पांच जगह पांवों के चिह्न मापने वाले उपकरण लगा चुका है लेकिन उसे फिलहाल बाघ के ठिकाने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। एक जगह सीसीटीवी पर तेंदुआ नजर आया। रेंजर हेम चंद्र गहतोड़ी का कहना है कि विभागीय टीम आसपास और सभी संभावित जंगलों में सघन अभियान चलाए हुए हैं। साथ ही मुनादी भी कराई जा रही है।
छह दिसंबर को ढकना बडोला के जंगल में बाघ ने घात लगाकर मीना देवी (35) पत्नी रमेश सिंह नरियाल को मौत के घाट उतार दिया था। इस वारदात के बाद से ढकना बडोला सहित आसपास के इलाके में दहशत है। लोग शाम पांच बजे बाद घरों में दुबक रहे हैं। सुबह की सैर पर भी इसका असर पड़ा है। दिन में भी लोग झुंड में ही आवाजाही कर रहे हैं।
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आज जिला प्रशासन से मिलेंगे ग्रामीण
चंपावत। ढकना की ग्राम प्रधान हीरा चौधरी, पार्वती, विमला, आनंदी, देवकी देवी, कमला, मालती, ईश्वरी, खीमा देवी आदि महिलाओं का कहना है कि बाघ के खौफ से उनका जंगल जाना बंद है। साथ ही रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी असर पड़ा है। अब ग्रामीण सोमवार को जिला प्रशासन से मुलाकात कर जल्द से जल्द बाघ को पकड़ने की मांग करेंगे।
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