चंपावत। 18 मार्च को त्रिवेंद्र सिंह रावत के अगुवाई वाली प्रदेश सरकार के तीन साल पूरे हो गए। उपलब्धियों के खूब दावे किए जा रहे हैं। लेकिन इन दावों के बीच ढेरों ऐसे कई काम लटके हैं, जिनकी वजह से लोगों की परेशानियां बढ़ी हैं। यहां तक कि दिसंबर 2016 में खुली मंच की उप तहसील में जनवरी 2017 से लटके तालों को नहीं खोला जा सका। इस कारण नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र के लोगों को चंपावत दौड़ लगानी पड़ रही है।
चंपावत में स्टेडियम, कठुवापाती में सिडकुल स्थापित करने, बाराकोट में 108 सेवा, लोहाघाट डिग्री कॉलेज में विधि संकाय खोलने, पाटी में आयुष डिग्री कॉलेज खोलने के मुख्यमंत्री के एलान भी लटके हैं। क्वैराला पंपिंग योजना को 2018 में पूरा होना था, लेकिन 30 करोड़ की इस योजना का 2020 तक पूरा होना भी कठिन है। जिले के पांच आईटीआई (बनबसा, मंच, बाराकोट, दिगालीचौड़ व भिंगराड़ा) में पिछले साल से ताले लटके हैं। सीमा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण टनकपुर-जौलजीबी रोड का रूपालीगाढ़ तक का काम भी ढाई साल से लटका हुआ है।
लटके हैं जिले के ये महत्वपूर्ण काम:
1.तीन साल पूर्व भवन हस्तांतरण होने के बाद शुरू नहीं हो सका टनकपुर व लोहाघाट के ट्रॉमा सेंटर।
2.सवा करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी सात साल से लटका है जिल जेल भवन।
3.दो साल से ठप है 2015 में शिलान्यास हुए पूर्णागिरि धाम के रोपवे का काम।
4.दस साल से लटका है पूर्णागिरि के मुख्य मंदिर की दरार के ट्रीटमेंट का काम।
5.धांधली के आरोप के बीच लोहाघाट के स्टेडियम में दो साल से काम ठप।
6.चंपावत हेलीपेड के काम को पूरा करने के लिए नहीं मिल रहा धन।
7.चंपावत तहसील व एसडीएम कार्यालय भवन निर्माण।
8.दो वर्ष से लटका है अमोड़ी डिग्री कॉलेज भवन निर्माण का काम।
9.सात साल से लटका हैं डॉक्टरों के आवास का निर्माण।
कोट
विधायक निधि के उपयोग से लेकर विकास के लिए दो दर्जन से अधिक सड़कों का मंजूरी मिली। इनमें से कई में काम भी पूरा कर लिया गया है। चंपावत रोडवेज स्टेशन निर्माण बनाया गया। डिक्टेश्वर व कूर्म सरोवर सहित क्षेत्र में विकास के तमाम काम किए गए हैं।
कैलाश गहतोड़ी, विधायक
विधायक निधि को लोगों की जरूरत के हिसाब से खर्च किया गया है। क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाया गया है। पाटी की कोरा पेयजल योजना, कोलीढेक झील, पुलहिंडोला में पेयजल संकट दूर करने सहित विकास के अनेकों कार्य किए गए हैं।
पूरन सिंह फर्त्याल,
विधायक, लोहाघाट।