नैनीताल हाइकोर्ट ने सभी जिलों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की नीति तीन माह में बनाने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन नगर निकायों की वर्तमान हालात को देखकर लगता है कि हाइकोर्ट के निर्देशों का पालन कैसे हो पाएगा। अकेले चंपावत जिला मुख्यालय में प्रतिदिन निकलने वाले तीन टन जैविक और अजैविक कूड़े का निस्तारण बड़ी समस्या बनते जा रहा है। मानवाधिकार आयोग की ओर से जिला प्रशासन को कूड़े के निस्तारण के लिए टंचिंग ग्राउंड की जमीन तलाशने के निर्देश दिए जाने के बाद भी इस दिशा में अब तक कोई पहल नहीं हो सकी है।
नगर पालिका को टंचिंग ग्राउंड के निर्माण के लिए जमीन नहीं मिलने के कारण वर्तमान में ललुवापानी रोड में सर्किट हाउस के पास खुले में कूड़े का निस्तारण किया जा रहा है। जिसकी सड़ांध से लोगों का जीना मुहाल हो रहा है। अभी तक जैविक और अजैविक कूड़े के निस्तारण के लिए अलग-अलग कोई व्यवस्था नहीं की गई है। पर्यावरण मित्रों को दस्ताने, ड्रेस मिलना तो दूर कई बार झाडू भी अपनी जेब से खर्च कर लेनी होती है। बॉयोमेडिकल वेस्ट के अलग से निस्तारण की भी कोई व्यवस्था नहीं है। नगर पालिका के ईओ अभिनव कुमार के अनुसार बनलेख के समीप टंचिंग ग्राउंड के लिए जमीन हासिल करने की प्रक्रिया को दिसंबर माह में ही ऑनलाइन कर दिया गया है। जैसे ही शासन की ओर से सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली जाएंगी, कूड़े कचरे के निस्तारण के लिए टंचिंग ग्राउंड का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। प्रतिदिन कूड़ा निस्तारण की पुख्ता इंतजाम नहीं होने से ललुवापानी रोड, टनकपुर रोड और बीआरसी के समीप अक्सर कूड़े के ढेर नजर आते हैं।
शो पीस बनी आठ लाख की कांपेक्टर मशीन
चंपावत। नगरपालिका की ओर से अजैविक कूड़े की रिसाइक्लिंग के लिए दो साल पूर्व करीब आठ लाख रुपए की कांपेक्टर मशीन लगाई गई है। इस मशीन में पॉलिथीन के कूड़े को रिसाइकिल कर उसके ईंधन संबंधी ब्लॉक तैयार किए जाने थे। सेलाखोला वन पंचायत की भूमि में लगाई गई कांपेक्टर मशीन आपरेटर न होने के कारण महज शो पीस बनी हुई है। मशीन का उपयोग एक बार भी नहीं किया जा सका।