चंपावत में बनलेख के पास टनकपुर अस्कोट पैदल मार्ग पर मलबा डालती मशीन।
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टनकपुर-पिथौरागढ़ के बीच बनाई जा रही बारहमासी सड़क के निर्माण के दौरान निकले मलबे से बनलेख और मौराड़ी गांव के गोचर और पनघट को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। जिसके विरोध में बनलेख और मौराड़ी के ग्रामीणों ने बुधवार को विरोध प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था की ओर से नियमों को ताख में रखकर मलबे को निर्धारित डंपिंग जोन के स्थान पर मनमाने स्थान में डालकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उनका कहना है कि बनलेख में टनकपुर-अस्कोट पैदल मार्ग में मलबा भरने से आने जाने का रास्ता बंद हो गया है। जबकि कमतोला और मौराड़ी गांव के श्मशान का रास्ता भी पूरी तरह से बंद हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड के अधिकारियों को कई बार जानकारी दिए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। ग्रामीण दिनेश जोशी, कमला चंद, नित्यानंद, मोहन चंद्र, चंद्रमणी, रामदत्त, दीक्षित, नमन, विमल भट्ट, हिमांशु, ईश्वरी दत्त, भवदेव आदि ने चेतावनी दी कि जल्द कार्यदायी संस्थाओं की मनमानी पर अंकुश नहीं लगा तो ग्रामीण उग्र आंदोलन शुरू करने को विवश हो जाएंगे।