चंपावत। प्रदेश के मुख्यमंत्री ही नहीं, जिले के कई प्रभारी मंत्रियों के कार्यक्षेत्र में भी बदलाव हुआ है। चंपावत जिले को चार साल में तीसरा प्रभारी मंत्री मिला है। राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेखा आर्या को कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय के स्थान पर दो साल बाद फिर से यह जिम्मेदारी दी गई है। प्रभारी के रूप में पहले कार्यकाल में मंत्री और दोनों विधायकों के बीच रिश्तों में खटास थी।
मार्च 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर राज्यमंत्री रेखा आर्या को चंपावत जिले का प्रभारी मंत्री बनाया गया था, लेकिन रेखा और जिले के दोनों विधायकों के अलावा तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष राम दत्त जोशी के बीच समन्वय की कमी के आरोप लगते रहे। यहां तक कि 2017-18 और 2018-19 के वित्त वर्ष की जिला योजना का अनुमोदन भी दोनों विधायकों की मौजूदगी के बगैर ही हुआ। 22 जून 2017 के बाद किसी भी कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री और दोनों विधायक एक साथ मौजूद नहीं रहे। वहीं 14 अप्रैल 2018 को आंबेडकर जयंती में हुए कार्यक्रम में तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष राम दत्त उपेक्षा से इस कदर आहत हुए कि वे बीच में कार्यक्रम छोड़ चले गए थे। फिर इसके बाद चार जून 2018 को प्रभारी मंत्री आर्या की मौजूदगी में हुई जिला योजना की बैठक में विधायकों के साथ वे भी शामिल नहीं हुए।
जून 2018 में रेखा आर्या को चंपावत के बजाय बागेश्वर का प्रभारी मंत्री बनाया गया। पिथौरागढ़ के साथ चंपावत का जिम्मा कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय को दे दिया गया, लेकिन अब तीरथ सिंह रावत सरकार ने फिर से रेखा आर्या को इस जिले का प्रभारी मंत्री बनाया है। इस रद्दोबदल पर लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल ने कोई टिप्पणी से इंकार कर दिया। वहीं चंपावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी का कहना है कि सरकार ने जरूरत के हिसाब से निर्णय लिया है।
कोट
जिले का प्रभारी मंत्री किसे बनाया जाए या किसे बदला जाए, ये सरकार जरूरत के अनुरूप तय करती है। तीरथ सिंह रावत सरकार में तीन नए मंत्री बनाए जाने के बाद प्रभारी मंत्रियों को नए सिरे से बनाया गया। अभी चंपावत और पिथौरागढ़ में एक ही प्रभारी मंत्री थे, अब दोनों जिलों में अलग मंत्री प्रभारी बनाए गए हैं। इससे विकास कार्य और योजनाओं की निगरानी में अधिक ध्यान दिया जा सकेगा।
- मोहन अधिकारी, जिला मीडिया प्रभारी, भाजपा।