150 किलोमीटर के टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच ने आजादी के बाद से 70 बड़े हादसों में सैकड़ों जिंदगियों को खत्म होते देखा है। सड़क सुधारीकरण के बावजूद अब भी इस मार्ग पर कई खतरनाक जोन है, जो यहां से गुजरने वालों में सिहरन पैदा करता है।
जुलाई 2008 में हुए अमरूबैंड हादसे को लोग अब भी नहीं भूले। एनएच के इस हिस्से में हुई दुर्घटना में 19 यात्रियों की मौत हो गई थी। हॉटमिक्स होने के बावजूद एनएच पर चंपावत से 22 किलोमीटर दूर स्वांला और स्वांला से 17 किलोमीटर दूर चल्थी हिस्सों में रोड अब भी कई जगह खतरनाक है। एनएच में धौन के पास रोड के किनारे बड़ा गड्ढा है। और यह हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। यह हिस्सा संकरा भी है। इतनी जगह भी नहीं कि एक साथ दो वाहन यहां से गुजर सके। इसके बाद स्वांला और अमोड़ी के बीच खराब रोड है। पैराफीट, क्रसबैरियर भी कुछ जगह टूटे हैं। लोगों का कहना है कि हॉटमिक्स के बावजूद कुछ स्पॉट अभी भी डेंजर जोन हैं।
गहरी खाई मगर पैरा फीट तक नहीं
चंपावत से बमुश्किल एक किलोमीटर दूर एनएच में जिला अस्पताल के पास एक बेहद खतरनाक स्पॉट है। इस मोड़ में 120 फीट गहरी खाई है। लेकिन इसमें बचाव का कोई इंतजाम नहीं है। न पैराफीट न कोई अन्य व्यवस्था। कई बार यहां सड़क दुर्घटना होती-होती बची है। लोगों का कहना है कि इस जगह में जल्द से जल्द पैराफीट बनाया जाए।
स्वांला मंदिर से रुकते हैं हादसे
एनएच पर यहां से 22 किलोमीटर दूर स्वांला के पास मां दुर्गा का मंदिर हैं। यह मंदिर 25 फरवरी 1952 को हुए रोड दुर्घटना के बाद बना। इस हादसे में बरेली स्थित आठवीं बटालियन पीएसी के 8 जवानों की मौत हो गई थी। भूपाल सिंह, जगत सिंह, मान सिंह, नैन सिंह, वीर सिंह, रुद्र सिंह, पुरुषोत्तम सिंह और बतवा सिंह लोकतंत्र के यज्ञ में शहीद हो गए। बाद में इस स्थान पर एक स्मारक भी बनाया गया। जिसमें इन सभी का नाम अंकित किया गया है। यहां के लोगों का मानना है कि इस मंदिर के बनने के बाद से हादसों में खासी कमी आई है।
चंपावत जिले के अंतर्गत आने वाले एनएच और दूसरे मोटर मार्गों में ब्लैक स्पॉट को चिह्नित किया गया है। जिले में हादसे के नजरिए से ऐसे तमाम स्थानों को ठीक करने के निर्माणदाई एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं। दुर्घटनाग्रस्त की आशंका वाले स्पॉट को जल्द ठीक कराया जाएगा।
दीपेंद्र कुमार चौधरी जिलाधिकारी, चंपावत।