सतीश जोशी सत्तू (संवाद) चंपावत। जिले में स्थित प्राकृतिक जल स्रोतों के बेहतर उपयोग की कवायद शुरू हो गई है। जिसके तहत चंपावत जिले के सभी प्राकृतिक जल स्रोतों की मैपिंग की जाएगी। जिसके लिए जिला प्रशासन की ओर से सभी विकासखंडों में नोडल अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने बताया कि जिले में स्थित प्राकृतिक जल स्रोत संसाधनों का भविष्य में बेहतर उपयोग करने के लिए उनकी मैपिंग किया जाना आवश्यक है। इसके लिए जिले के सभी प्राकृतिक जल स्रोतों के उद्गम, अंत एवं उसके कैचमेंट एरिया के मिलने वाले जल प्रावहिकाओं का संपूर्ण विवरण होना आवश्यक है। ताकि जीपीएस मैपिंग कर जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्द्धन की योजना प्रभावी ढंग से बनाई जा सके। इसलिए जिले में स्थित सभी प्राकृतिक जल स्रोतों की सूचनाओं उसकी लंबाई-चौड़ाई तथा मौजूदा स्थलीय स्थिति की सूचनाओं के संकलन के लिए विकासखंडवार विभागों को दायित्व दिए गए है। डीएम ने गठित विभागीय टीमों से 31 मई तक सर्वेक्षण पूर्ण करने के बाद विभाग में उपलब्ध जीपीएस टेक्निशियन एवं जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के जीपीएस टेक्नीशियन की ओर से मैपिंग करवाने के निर्देश दिए हैं। -:: सभी ब्लाकों में नियुक्त किए गए नोडल अधिकारी ::- चंपावत। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने बताया विकासखंड चंपावत के लिए जल संस्थान के ईई बीलाल यूनुस को नोडल अधिकारी बनाया गया है। इसी प्रकार लोहाघाट के लिए सिंचाई निर्माण खंड के ईई, बाराकोट के लिए लघु सिंचाई एवं पाटी के लिए सीएनडीसी के ईई को नोडल अधिकारी बनाया गया है।