फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मजदूर पूछ रहे- एक माह पूरा हुआ, राहत केंद्र से कब मिलेगा छुटकारा

विज्ञापन
चंपावत राहत केंद्र के बाहर पार्क में उप्र के मजदूर। - फोटो : AMAR UJALA
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के 14 मजदूरों को चंपावत के रैनबसेरा में बने राहत केंद्र में रहते हुए बुधवार को एक माह पूरा हो गया है। अब ये मजदूर इससे निजात पाना चाहते हैं। बार-बार पूछ रहे हैं कि उन्हें कब छुट्टी मिलेगी? इसी राहत केंद्र की पहली मंजिल में रहने वाले उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के 17 मजदूरों को 25 अप्रैल को ऊधमसिंह नगर जिले में भेजने के बाद इन मजदूरों में और बैचेनी है। उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों को वापस लाने का एलान किया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठ सका है।  पिथौरागढ़ और चंपावत जिले के लोहाघाट सहित कई जगह काम करने वाले ये मजदूर (रामचंद्र, रामकिशन, राकेश, जगसेन, चेतराम, कैलाश, शंभू, अमृतलाल, रामखेलावन, ज्ञान प्रसाद, मिथिलेश, रामस्वरूप, बुंदी राम और श्रीधर) लॉकडाउन में बेकाम हो गए। पैदल ही अपने घरों को जाने का प्रयास करते हुए वे 29 मार्च को यहां राहत केंद्र पहुंचा दिए गए। मजदूर बताते हैं कि राहत केंद्र में उन्हें सोने को बिस्तर और दो वक्त का खाना तो ठीक से मिल रहा है, लेकिन घर, माता-पिता-बच्चों और खेती की फिक्र सता रही है। जब रैनबसेरा के दूसरी मंजिल वाले उप्र के मजदूरों को यूएस नगर जिला भेजा गया, तो उनमें भी उम्मीद जगी कि वे भी जल्द ही यहां से भेज दिए जाएंगे। यहां आने वाले अधिकारी-कर्मचारियों से पूछा, तो जवाब मायूस करने वाला मिला। एक महीना होने के बाद भी उन्हें यह नहीं पता कि उन्हें अभी और कितना यहां रहना होगा। बोले-क्वारंटीन होने की अवधि 14 दिन है, लेकिन वे तो यहां 28 दिन से ज्यादा रह चुके हैं और अब भी उन्हें जल्द घर जाने की कोई उम्मीद नजर नहीं आती। यहां आने वाले अधिकारियों से पूछते हैं, तो वे बताते हैं कि आप (मजदूर) क्वारंटीन में नहीं, राहत शिविर में हो। हताश मजदूर को कोरोना के खतरे के कम होने के अलावा अब ऊपर वाले का आसरा है।  ::: सशर्त भेजा जायेगा::: चंपावत जिले के विभिन्न राहत केंद्रों में रह रहे मजदूर और अन्य लोगों से राज्य के भीतर के उनके इच्छित स्थान मांगे गए थे। शर्त यह थी कि जिस जिले में वे जाना चाहते हो, वहां उन्हें लेने को तैयार किसी व्यक्ति की सहमति हो। रैनबसेरा राहत केंद्र में रह रहे बहराइच जिले के मजदूर इस शर्त को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए उन्हें यहां से नहीं भेजा गया है।  सुरेंद्र नारायण पांडेय,  डीएम, चंपावत। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें