चंपावत। जिले के लधियाघाटी क्षेत्र के शीला देवी मंदिर समिति ने मंदिर परिसर में पशु बलि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए मंदिर में शराब पीकर आने वालों पर पांच हजार रुपये जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में पर्यावरण संरक्षण के लिए किसी भी प्रकार के पेड़-पौधों के काटने पर भी जुर्माना लगाने के साथ कानूनी कार्रवाई किए जाने का निर्णय लिया है। मंदिर समिति के अध्यक्ष दीवान सिंह बडेला और सदस्य नवीन सिंह भंडारी ने बताया कि समिति की ओर से मंदिर में मनौती पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं की ओर से दी जाने वाली पशु बलि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने का निर्णय लिया गया है। किसी प्रकार की बलि देते पकड़े जाने पर संबंधितों के खिलाफ जुर्माना लगाने के साथ कानूनी कार्रवाई किए जाने का निर्णय भी लिया गया है। मंदिर में शराब पीकर आने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा। साथ ही मंदिर परिसर में फवनबगड़ से लेकर दुधौर के घाट के बीच में जो भी पेड़ पौधे हैं उन्हें काटने पर रोक लगाई गई है। मंदिर समिति की ओर से नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी।
लाटरी के आधार तीसरी बार पुजारी चुने गए राजेंद्र कोटिया
चंपावत। शीला देवी मंदिर समिति की बैठक में लाटरी के आधार पर राजेंद्र कोटिया को तीसरी बार पुजारी चुना गया। तय किया गया कि भविष्य में भी मंदिर के पुजारी का चुनाव लाटरी के आधार पर ही किया जाएगा। बैठक में अध्यक्ष दीवान सिंह बडेला, नवीन सिंह भंडारी, पुष्कर सिंह बगोटी, जगत सिंह बगोटी, नारायण कोटिया, ग्राम प्रधान भुवन राम, भुवन भट्ट, भूपाल बोहरा, दीपक जोशी, सुभाष जोशी, मदन जोशी आदि शामिल रहे। (संवाद)
पूर्णागिरि और बाराही धाम में पहले से वर्जित हैं पशुबलि
चंपावत। जिले में स्थित उत्तर भारत के प्रमुख देवी शक्तिपीठ मां पूर्णागिरि धाम और बग्वाल युद्ध के लिए प्रसिद्ध मां बाराही धाम में पूर्व से ही पशुबलि पूरी तरह से वर्जित है। इसके अलावा जिले के घटकू, सीमांत तामली, नीड़, धौन आदि स्थानों में दशहरा पर्व की जाने वाली पशुबलियों में भी बीते पांच सालों से प्रतिबंध लगा हुआ है। (संवाद)