चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विधानसभा क्षेत्र में शामिल सीमांत तल्लादेश के 52 किलोमीटर के दायरे में उच्चशिक्षा की सुविधा नहीं होने से छात्र-छात्राओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गरीब बच्चे इंटरमीडिएट के बाद उच्चशिक्षा से वंचित हो जा रहे हैं। इधर, क्षेत्र में राजकीय महाविद्यालय खोलने की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्र के लोगों ने मुख्यमंत्री और उच्चशिक्षा मंत्री को इस संबंध में ज्ञापन भेजा है।
सीमांत तल्लादेश क्षेत्र के मंच जीआईसी और तामली जीआईसी से प्रतिवर्ष 150 से 200 छात्र-छात्राएं इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं। इसमें से 50 प्रतिशत छात्र-छात्राओं को आर्थिक तंगी के कारण उच्चशिक्षा से वंचित रहना पड़ता है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता शेर सिंह महर, राहुल सिंह, ग्राम प्रधान दीपक सिंह, बची सिंह, फतेह सिंह, दीवान सिंह ने सीएम पुष्कर सिंह धामी और उच्चशिक्षामंत्री डॉ. धन सिंह रावत को भेजे ज्ञापन में कहा है कि दो न्याय पंचायत, 22 ग्राम पंचायतों और एक जिला पंचायत क्षेत्र की करीब तीस हजार की आबादी उच्चशिक्षा के अभाव में पिछड़ती जा रही है।
उन्होंने कहा है कि तल्लादेश में शिक्षा के अभाव के कारण संपन्न परिवारों के लोग बड़े शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। उच्चशिक्षा के लिए यहां के लोग पैतृक संपत्ति छोड़कर उचौलीगोठ, टनकपुर, खटीमा, बनबसा जैसे क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। उनका कहना है कि चंपावत जिले में टनकपुर से लोहाघाट तक 90 किमी के दायरे में चार महाविद्यालय खोले गए हैं। इन महाविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने के लिए तल्लादेश क्षेत्र से 200 से अधिक छात्र-छात्राएं जाते हैं जो काफी खर्चीला होता है। ज्ञापन में कहा है कि सीमांत मंच के ग्रामीणों ने सर्व सम्मति से महाविद्यालय निर्माण के लिए निशुल्क भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।