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Champawat News: मॉडल जिले में बाराकोट ब्लाॅक में मयस्सर नहीं डिग्री कॉलेज

Mon, 10 Nov 2025 10:38 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
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नवल जोशी
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लोहाघाट (चंपावत)। मॉडल जिले के बाराकोट ब्लॉक के छात्र-छात्राओं और अभिभावकों का ब्लाॅक में डिग्री कॉलेज खोलने का सपना पूरा नहीं हो पाया है। ब्लॉक में डिग्री कॉलेज न होने से विद्यार्थियों और अभिभावकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
सीएम पुष्कर सिंह धामी के मॉडल चंपावत जिले के तीन ब्लाॅकों में उच्च शिक्षा की व्यवस्था है लेकिन बाराकोट ब्लाॅक की उपेक्षा हुई है। यहां डिग्री कॉलेज खोलने की मांग क्षेत्रीय लोग, जनप्रतिनिधि, अभिभावक और छात्र-छात्राएं लंबे समय से कर रहे हैं लेकिन अब तक निराशा ही हाथ लगी है। ब्लाॅक में डिग्री कॉलेज न होने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा लेने से वंचित हो रहे हैं।
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क्षेत्रीय लोगों ने ब्लाॅक में डिग्री कॉलेज न खुलने पर सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई है। करीब 40 हजार से अधिक की आबादी वाले ब्लाॅक में कॉलेज न होने से छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए नगर से करीब 12 किमी दूर और ग्रामीण क्षेत्रों से 25 से 40 किमी का सफर तय कर लोहाघाट जाना पड़ता है। सक्षम अभिभावक तो अपने बच्चों को लोहाघाट में कमरा किराये पर लेकर पढ़ा रहे हैं लेकिन गरीब तबके के बच्चों के लिए दिक्कत बढ़ जाती है। संवाद


तीन ब्लाॅकों में कैंपस समेत सात डिग्री कॉलेज
लोहाघाट ब्लाॅक में पीजी कॉलेज लोहाघाट, पाटी ब्लाॅक में डिग्री कॉलेज देवीधुरा, डिग्री कॉलेज पाटी, चंपावत ब्लाॅक में एसएसजे विश्वविद्यालय का चंपावत कैंपस, डिग्री कॉलेज अमोड़ी, डिग्री कॉलेज टनकपुर और डिग्री कॉलेज बनबसा है।


बाराकोट में डिग्री कॉलेज न होने से छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए काफी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। लोहाघाट पीजी कॉलेज में पढ़ाई के लिए आने में काफी समय और किराया लगता है। आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों पर काफी बोझ पड़ रहा है। छात्र-छात्राओं की दिक्कतों को देखते हुए प्राथमिकता के आधार पर ब्लाॅक में डिग्री कॉलेज खोलना चाहिए। - नेहा भंडारी, छात्रा
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बाराकोट ब्लाॅक में डिग्री कॉलेज न होने का खामियाजा छात्र-छात्राएं भुगत रहे हैं। लोहाघाट में कमरा किराया लेकर पढ़ाई करने में काफी परेशानियां होती हैं। वाहनों के जरिये आने-जाने में काफी समय और धन खर्च होता है। कभी-कभी समय से वाहन न मिलने पर वे लोग कॉलेज नहीं पहुंच पाते हैं। छात्रहित में ब्लाॅक में एक डिग्री कॉलेज खोला जाना जरूरी है। - आरती चौधरी
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