लोहाघाट (चंपावत)। जहां एक ओर कोरोना महामारी शहर और गांवों में तेजी से पांव पसार रही है, वहीं विकासखंड लोहाघाट के नेपाल सीमा से लगा मडलक गांव ग्रामीणों की जागरूकता के बल पर पूरी तरह से महफूज है। कोरोना की की दोनों लहरों के दौरान गांव के किसी भी व्यक्ति को कोरोना महामारी छू भी नहीं सकी है। इसकी एक वजह ग्रामीणों का जागरूक होना और शासन प्रशासन के निर्देेशों का कड़ाई से पालन करना बताया जा रहा है।
लोहाघाट से 26 किमी. दूर करीब एक हजार की आबादी वाले इस मडलक गांव में कोरोना की पहली लहर के दौरान 76 प्रवासी गांव में लौटकर आए थे। उस दौरान सभी प्रवासियों के गांव के जीआईसी में 14 दिनों के अनिवार्य क्वारंटीन किया गया था। क्वारंटीन की समयावधि पूर्ण करने और पूर्ण स्वास्थ्य जांच के बाद ही उन्हें गांव में प्रवेश दिया गया था। इससे गांव में कोरोना महामारी नहीं पहुंच सकी। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लॉकडाउन से पूर्व करीब 37 प्रवासी गांव में आए हैं, जिन्होंने होम आइसोलेशन का कड़ाई से पालन किया। गांव में लोग सुरक्षित दूरी का पालन करने के साथ मास्क लगाकर खुद को सैनिटाइज कर कोरोना को अपने पास फटकने तक नहीं दे रहे हैं। (संवाद)