चंपावत। जिले के सीमांत क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच अब धीरे-धीरे असर दिखाने लगी है। भजनपुर जैसे दूरस्थ गांवों में एमबीएडीपी जैसी योजनाएं महिलाओं की जिंदगी बदलने का जरिया बन रही हैं जहां महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर पहले न के बराबर थे। वहीं जिले की सीमांत ग्राम पंचायत भजनपुर की महिलाओं ने साबित कर दिया है कि हौसला और मेहनत हो तो सफलता घर तक चली आती है। यहां की जय मां पूर्णागिरि स्वयं सहायता समूह की महिलाएं एमबीएडीपी योजना का लाभ उठाकर नमकीन उद्यम स्थापित करने में सफल रही हैं और अब प्रत्येक सदस्य महिला सात से आठ हजार रुपये की मासिक आय अर्जित कर रही है।
वर्ष 2022 में पांच महिलाओं ने मिलकर इस समूह की नींव रखी और सरिता सिंह को समूह का अध्यक्ष चुना। धीरे-धीरे महिलाओं ने उत्पादन की तकनीक, पैकेजिंग की बारीकियां और बाजार की जरूरतें समझीं। आज ये महिलाएं कच्चे माल की तैयारी से लेकर पैकेजिंग और मार्केटिंग तक का संपूर्ण काम खुद संभाल रही हैं।
समूह की ओर से बनी नमकीन की शुद्धता और बेहतर स्वाद के चलते स्थानीय बाजारों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। अध्यक्ष सरिता सिंह का कहना है कि सरकार की इस योजना ने उन्हें घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ आय का एक स्थायी जरिया दिया है। इससे मिलने वाली राशि का उपयोग वे परिवार के भरण-पोषण और बच्चों की बेहतर शिक्षा में कर रही हैं।
समूह की यह सफलता आसपास के गांवों की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही महिला सशक्तीकरण की दिशा में भी एक ठोस कदम है।