चंपावत। स्कूली बच्चों के बस्ते का वजन हल्का नहीं हा रहा है। शिक्षा विभाग की ओर से सभी निजी विद्यालयों को बस्तों का वजन तय मानक अनुसार किए जाने को लेकर निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद बच्चों का बस्ता काॅपी और किताबों से और भारी होता जा रहा है।
निजी विद्यालयों के प्राथमिक कक्षाओं से ही बच्चे काॅपी-किताबों का भारी वजन उठाते हैं। बस्ते के वजन के कारण बच्चों के कंधे आगे की ओर झुके होते हैं। ऐसे में अधिकतर अभिभावक बच्चों के बस्ते का वजन अपने कंधे में उठाकर उसे स्कूल तक पहुंचाने जाते हैं। अभिभावकों ने इसे लेकर विद्यालयों की शिकायत मौखिक रूप में विभाग से की है। विभाग अब ऐसे सभी विद्यालयों पर नकेल कसने की तैयारी में है। जिन स्कूलों में मानकों के अनुसार बच्चों के बस्ते का वजन कम नहीं पाया गया तो जारी नियमों का उल्लंंघन करने और अनियमितता पाए जाने पर ऐसे सभी स्कूलों को ब्लैक लिस्ट किया जाएगा।
-
कोट
विद्यालयों को जारी मानकों के आधार पर स्कूली बच्चों के बस्तों का वजन तय किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। अभिभावकों की ओर से मिल रही मौखिक सूचना के आधार पर इन सभी विद्यालयों को चेताया गया है। खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से स्कूलों पर नजर रखी जा रही है। जो शासन की ओर से जारी मानकों का पालन नहीं करेंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी।
मेहरबान सिंह बिष्ट, सीईओ, चंपावत।