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Champawat News: धीरे-धीरे लोगों को विदा होते देख रहा खामोश खड़ा गांव

Sat, 07 Mar 2026 10:54 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
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दूरस्थ बकोड़ा क्षेत्र
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मंच/चंपावत। मोस्टा बकोड़ा में उदासी बढ़ रही है। इस गांव के घर-आंगन और बाखलियां धीरे-धीरे खामोशी का आवरण ओढ़ रहे हैं। 500 से अधिक घर वाले इस गांव में अब 300 से कम परिवार रह गए हैं।
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पलायन का सबसे बड़ा कारण सड़क और सुविधाओं की कमी है। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी उन्हें करीब 12 किमी दूर मंच तक जाना पड़ता है और कभी-कभी 24 किमी लंबा सफर तय करना पड़ता है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने यहां के लोगों को अपना पुश्तैनी घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है।

शिक्षा और स्वास्थ्य की चुनौतियां
गांव में शिक्षा केवल आठवीं तक है। इंटर की पढ़ाई के लिए बच्चों को 12 किमी दूर मंच या टनकपुर जाना पड़ता है। वहीं, गंभीर बीमारियों या हादसे की स्थिति में मरीजों को डोली के सहारे सड़क तक लाना पड़ता है। रात के समय ग्रामीण बीमार को लाने से कतराते हैं, और सुबह के उजाले में उन्हें अस्पताल तक पहुंचाते हैं।
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गहत की मशहूर खेती अब घट रही
मोस्टा बकोड़ा कभी गहत की खेती के लिए जाना जाता था। लेकिन सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी ने खेती-बाड़ी पर असर डाला है। अब केवल 50 फीसदी से कम लोग खेती कर रहे हैं और सब्जी उत्पादन भी घट गया है।

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मोस्टा बकोड़ा क्षेत्र में सड़क न होने के कारण लोगों के लिए जीवन बिताना आसान नहीं है। बीमारों, घायलों, गर्भवतियों के लिए डोली ही एकमात्र सहारा है। सड़क की सुविधा होती तो रिवर्स पलायन होता और गहत की खेती फिर से लहलहाती। पिछले कुछ सालों से लगातार पलायन हो रहा है। - रवींद्र रावत, प्रधान मोस्टा बकोड़ा

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सड़क के अभाव में पिछले कुछ सालों से पलायन बढ़ा है। लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए मुख्यालय और बाहरी जिलों में चले गए हैं। जब गांव में पूजा-पाठ या अन्य कोई काज होता है तब लोग आते हैं। कई घर वीरान पड़े हैं। अपनी मिट्टी छोड़कर कोई जाना नहीं चाहता है लेकिन मजबूर हैं। -फते सिंह, स्थानीय बकोड़ा
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